फोटो: 31 भरथना के पागलबाबा गंगासागर धाम पर बने सरोवर में स्नान करते श्रद्धालु। स्रोत मंदिर प्रशासन
फोटो: 32 भरथना के बालूगंज में गंगा दशहरा के पर्व पर शरबत वितरति करते श्रद्धालु। स्रोत स्वंय
श्रद्धालुओं ने राहगीरों को बांटा ठंडा शरबत
संवाद न्यूज एजेंसी
भरथना। ओम श्री पागलबाबा गंगासागर धाम में गंगा दशहरा पर्व श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ मनाया गया। पर्व के उपलक्ष्य में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में बने सरोवर में स्नान किया। श्रद्धालुओं ने गंगा मैया का स्मरण करते हुए सुख-समृद्धि एवं कल्याण की कामना की। इससे पूर्व मंदिर के मुख्य न्यासी श्याम सुंदर चौरसिया ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जल अर्पित किया। वहीं परिसर में आयोजित नौ मंजिला शिखर पूजन एवं पंचतत्व हरिहर महायज्ञ के तहत सोमवार सुबह वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच महायज्ञ संपन्न हुआ। यज्ञाचार्यों ने वैदिक रीति से आहुतियां दिलाईं। धार्मिक अनुष्ठानों में श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।
वहीं इस पावन अवसर पर मोहल्ला बालूगंज में पानी की टंकी के पास स्थित शिव मंदिर पर सोमवार को गंगा दशहरा के पर्व पर श्रद्धा एवं सेवा भाव के साथ शरबत वितरित किया गया। भीषण गर्मी और तेज धूप के बीच आयोजित इस सेवा कार्य में बड़ी संख्या में राहगीरों, दुकानदारों एवं स्थानीय लोगों ने शरबत ग्रहण कर राहत महसूस की। शरबत वितरण कार्यक्रम का शुभारंभ मंगल सिंह भदौरिया ने किया। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में पर्वों पर सेवा और परोपकार का विशेष महत्व है। शरबत वितरण में दीपू त्रिपाठी व सीपू संचित कुमार, अजय पोरवाल, आदित्य पोरवाल एवं कृष्णा यादव आदि कई युवाओं का विशेष योगदान रहा।
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जसवंतनगर में इस बार स्नान को निकले कम श्रद्धालु
जसवंतनगर। इस वर्ष अधिक मास होने के कारण गंगा दशहरा दो तिथियों में मनाया जा रहा है। श्रद्धालुओं के अनुसार एक तिथि सोमवार को मनाई, जबकि दूसरी 24 जून को मनाई जाएगी। इसके चलते पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की संख्या कम रही। प्रशासन ने पूर्व वर्षों में गंगा दशहरा के दौरान डूबने से हुई मौतों और हादसों को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त सावधानी बरती। नहर में गहरे पानी की ओर जाने और छलांग लगाकर स्नान करने पर पूर्ण प्रतिबंध रखा गया। एसडीएम कुमार सत्यमजीत व सीओ ने विभिन्न पुलों और स्नान स्थलों का निरीक्षण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। विभिन्न स्नान स्थलों पर पुलिस तैनात रही और हादसों को रोकने के लिए श्रद्धालुओं को नहर में कूदकर स्नान करने की अनुमति नहीं दी। लोगों ने सिर्फ निर्धारित सुरक्षित स्थानों पर ही स्नान किया। प्रशासन ने सिहोल नहर पुल के पास किनारे पर बनी सीढ़ियों पर ही स्नान की अनुमति दी थी। जबकि कचोरा-नहर पुल पर भी श्रद्धालुओं को किनारे पर रहकर स्नान करने के निर्देश दिए गए।