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इस साल गेहूं में परता नहीं, अन्नदाता चिंतित

Tue, 05 Apr 2016 11:53 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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गेहूं की पकी फसल काटते किसान - फोटो : अमर उजाला
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होली के बाद तापमान में तेजी से बदलाव के चलते खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जल्द पक जाने  से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आई हैं। बीच-बीच में बादलों के उमड़ने से  किसानों की धड़कने बढ़ने लगती है। साथ ही उन्हें यह डर सताने लगता है कि पानी बरसा तो गेहूं की पकी फसल बर्बाद हो जाएगी। किसान इस बात को लेकर परेशान है कि इस साल भी गेहूं में परता नहीं पड़ेगा।
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अबकी पूरे साल पर्याप्त बरसात नहीं हुई। सर्दी के मौसम में सर्दी भी नहीं पड़ी। सर्दी के मौसम में भी तापमान काफी अधिक रहा, जिसका असर पिछली धान व आलू की फसल एवं इस समय की गेहूं की फसल पर पड़ रहा है। धान व आलू की पैदावार 15 से 20 फीसदी तक कम रही। गेहूं की फसल पर विपरीत असर साफ नजर आ रहा है। सर्दी कम  पड़ने एवं तापमान सर्दी में अधिक रहने के कारण जहां गेहूं का दाना पूर्ण रूप से विकसित नहीं हो पाया। 


होली के त्यौहार के बाद तापमान में और तेजी से वृद्धि होने से 10 दिन के भीतर पूरी गेहूं की फसल पक गई। गांव कुड़रिया के किसान सुबोध तिवारी कहते हैं कि  तापमान के कारण गेहूं की फसल जल्द पक जाने से  दाना कमजोर रहेगा और पैदावार कम रहेगी। गेहूं की पैदावार में 30 फीसदी गिरावट की संभावना जताई जा रही है। यही नहीं गेहूं के जल्द पक जाने और पिछले तीन दिनों से बादलों के मंडराने से किसान बेहद चिंतित हैं। अगर पानी बरस गया तो गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो सकती है।
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वहीं, कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि  गेहूं की फसल के पकने के समय तापमान में वृद्धि नुकसानदेह होती है। अब तो जो नुकसान होना था वह हो गया। फसल के उत्पादन में आंशिक गिरावट आ सकती है। जनता कालेज बकेवर के उद्यान विभाग के प्रोफेसर डॉ. अशोक पांडेय का कहना है कि  होली के बाद वातावरण में आई कुछ नरमी से उम्मीद बंधी थी कि फसल अच्छी हो जाएगी। परंतु दो दिन बाद ही तापमान में हुई बढ़ोत्तरी से पैदावार पर असर पड़ा है।
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