इटावा। खरीफ फसलों की बुवाई के बीच किसानों को उर्वरक की उपलब्धता को लेकर कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि जनपद में इस समय किसी भी प्रकार के उर्वरक की कोई कमी नहीं है। सहकारी समितियों, पीसीएफ केंद्रों और फुटकर विक्रेताओं के यहां पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध है। किसानों से अपील की गई है कि वे निर्धारित दरों पर अपनी जरूरत के अनुसार ही उर्वरक खरीदें और किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।
जिला कृषि अधिकारी ओंकार सिंह ने बताया कि जिले में वर्तमान में यूरिया 23,148 मीट्रिक टन, डीएपी 8,263 मीट्रिक टन, एनपीके 2,078 मीट्रिक टन, एमओपी 154 मीट्रिक टन और एसएसपी 904 मीट्रिक टन उपलब्ध है। उर्वरक वितरण पूरी तरह पॉस मशीन के माध्यम से किया जा रहा है। किसान के आधार या फार्मर आईडी से खरीद का पूरा रिकॉर्ड दर्ज होगा। यदि कोई किसान दूसरी दुकान से खाद लेने जाएगा तो मशीन पर पहले से खरीदी गई मात्रा दिखाई देगी। ऐसे में निर्धारित सीमा से अधिक उर्वरक की बिक्री करने वाले विक्रेताओं पर कार्रवाई की जाएगी।
यदि भूमि बटाई पर दी गई है, तो मूल कृषक (भू-स्वामी) और बटाईदार के मध्य सहमति पत्र (जिसमें बटाई पर दी गई भूमि का स्पष्ट उल्लेख हो) आवश्यक है। खेती कर रहा बटाईदार अपने आधार कार्ड और मूल कृषक की खतौनी में दर्ज क्षेत्रफल के अनुसार उर्वरक प्राप्त कर सकेगा। दुकानदार को इस साक्ष्य की एक प्रति अपनी फाइल में सुरक्षित रखनी होगी।
कृषि विभाग के अनुसार एक सीजन में प्रति हेक्टेयर अधिकतम पांच बोरी डीएपी और सात बोरी यूरिया देने का प्रावधान है। जिन किसानों की फार्मर आईडी नहीं बनी है, वे राजकीय कृषि बीज भंडार या जनसेवा केंद्र पर इसे बनवा सकते हैं। जिन क्षेत्रों में चकबंदी चल रही है, वहां किसान पुरानी खतौनी के आधार पर उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसी भी विक्रेता की ओर से किसानों की जबरन टैगिंग करने या उर्वरक के साथ अन्य सामान खरीदने का दबाव बनाने की शिकायत मिलने पर उर्वरक नियंत्रण आदेश के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। किसानों को किसी भी प्रकार की असुविधा होने पर जिला कृषि कार्यालय के कंट्रोल रूम के मोबाइल नंबर 7839882538 और 9012000859 पर संपर्क करने की सलाह दी गई है।