इटावा। आमजन के लिए सफारी खुलते ही सैलानियों के आने का सिलसिला शुरू हो गया। यह बात दीगर है कि सैलानियों की संख्या अभी अपेक्षित नहीं दिख रही। लोगों में अभी भी कहीं न कहीं कोरोना का भय बसा हुआ है। हालांकि मंगलवार और बुधवार यहां पहुंचे कुल 146 सैलानियों ने सफारी के वातावरण का भरपूर लुत्फ उठाया। बुधवार को कानपुर के विधायक हाजी इरफान सोलंकी भी सफारी के दीदार को पहुंचे।
विधायक ने परिजनों और रिश्तेदारों के साथ यहां के माहौल का आनंद लिया। इनके अलावा इटावा के आसपास क्षेत्रों और कानपुर, लखनऊ और ग्वालियर, कन्नौज जिलों के लोग भी आने वालों में शामिल रहे। कोरोना संक्रमण की वजह से इटावा सफारी को मार्च महीने से आम जनता के लिए बंद कर दिया गया था।
गत मंगलवार से जब सफारी आम लोगों के लिए खोली गई तो प्रशासन ने कोरोना से बचाव के सभी समुचित कदम उठाए हैं। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक पर्यटक सफारी का आनंद ले रहे हैं। गेट पर उनकी थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही है। बगैर मास्क प्रवेश वर्जित रखा है। टिकट खिड़की और बस में बैठने तक कई बार सैनिटाइज किया जा रहा है।
अक्तूबर में बढ़ेंगी और सुविधाएं
फिलहाला सफारी के अंदर सैलानियों को भालू, एंटीलोप और हिरन देखने को मिल रहे हैं। सफारी के निदेशक वीके सिंह ने बताया कि अक्तूबर महीने में वाइल्ड लाइफ वीक मनाया जाएगा। तब सफारी के भीतर सैलानियों के लिए सुविधाओं में और बढ़ोतरी होगी। तब तक ज्यादातर लोग कोरोना संक्रमण को लेकर काफी जागरूक भी हो चुके होंगे।
उन्होंने बताया कि फिलहाल कोरोना संक्रमण की गाइडलाइन का पूरा पालन किया जा रहा है। गेट से दाखिल होते ही पर्यटक को सैनिटाइज किया जा रहा। टिकट खिड़की के बाद सैनिटाइज करते हैं। बस भी हर बार सैनिटाइज की जा रही है। पर्यटक दो घंटे बस से घूम सकते हैं। जबकि वह चार घंटे सफारी के अंदर गुजार सकते हैं। लोगों ने निकलना शुरू किया है। यह सुखद खबर है।
राष्ट्रीय धरोहर के आए हैं देखने
कानपुर से सपा विधायक हाजी इरफान सोलंकी ने कहा कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव इटावा में धरोहर बनाई है। उसे देखने तो आना ही है। इस सफारी को अभी और आगे लेकर जाना है। इसका जितना अधिक प्रचार प्रसार होगा। उतने ही अधिक पर्यटक यहां आने के लिए लालायित होंगे।
शेर नहीं दिखा, थोड़ी मायूसी रही
सैफई मेडिकल यूनिवर्सिटी के छात्र मोहम्मद दानिश साथी साजिद के साथ घूमने को आए। मूल रूप से कन्नौज निवासी दानिश और करहल निवासी साजिद भी यहां वातारण से बेहद प्रभावित दिखे। उन्होंने बताया कि बहुत ही यूनीक प्रोजक्ट है। पूरा सेटअप नेचुरल लगता है। थोड़ी इस बात को लेेकर मायूसी हाथ लगी है कि शेर देखने को नहीं मिला। हालांकि मोर, बारहसिंगा और हिरन को चौकड़ी भरते देखना अच्छा लगा।