दवाइयों के खुदरा व्यापार में फार्मासिस्ट की
अनिवार्यता का नियम वापस लेने की मांग को लेकर बुधवार को जिलेभर के दवा
कारोबारी हड़ताल पर रहे। जनपद में दवा की थोक और फुटकर की करीब 500 दुकानों
पर ताले लटके रहे। इटावा ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष उमाकांत
जैन ने बताया की हड़ताल से जिले में करीब चार करोड़ रुपये का दवा कारोबार
प्रभावित हुआ है।
हड़ताल के कारण मरीज और तीमारदार दिनभर दवाई के लिए इधर-उधर भटकते रहे। इटावा ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन व केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट फेडरेशन के बैनर तले बुधवार को दवा विक्रेताओं ने अपनी दुकानें बंद रखी।
एसोसिएशन के पदाधिकारी व दवा विक्रेता जवाहर मार्केट में एकत्र हुए और यहां से वाहन जुलूस निकाला। वाहन जुलूस स्टेशन रोड़ से शुरू होकर नौरंगाबाद चौराहा, तिकोनिया, नगरपालिका चौराहा, तहसील चौराहा, साबितगंज, बस स्टैंड, शास्त्री चौराहा होते हुए कचहरी पहुंचे और जिलाधिकारी को प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा।
एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष उमाकांत जैन ने कहा कि केंद्र सरकार ने नया नियम लागू कर खुदरा व्यापार को बड़ा झटका दिया है। छोटे व्यापारी की दुकान पर फार्मासिस्ट को रखा जाना संभव नहीं क्योंकि पहले से ही फार्मासिस्ट की भारी कमी है।
ऐसे में ड्रग लाइसेंसों का नवीनीकरण न किए जाने से दवा व्यापारियों की दुकानें बंद होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि फार्मेसी को भी समाप्त किया जाए। जिससे दवाओं को आनलाइन बेचने के इस नियम का खामियाजा दुकानदारों व जनता को न भुगतना पड़े।
विरोध प्रदर्शन में मुख्य रूप से ड्रग एण्ड केमिस्ट एसोसिएशन के सचिव मनु गुप्ता आदि शामिल रहे। हालांकि जिला अस्पताल एवं अन्य प्राथमिक सेवाओं पर हड़ताल का ज्यादा असर नहीं पड़ा।गांव से आए मरीजों और उनके तीमारदारों को खासी परेशानियों का सामना करना पड़ा।