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Etawah News: चंबल में बढ़ी घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या

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फोटो: 8:: सर्दी के चलते चंबल के बीच रेत के टीले पर धूप सेंकते घड़ियाल व मगरमच्छ। स्रोत-विभाग
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चकरनगर। चंबल सेंक्चुअरी की इटावा रेंज में 24 दिसंबर को वन विभाग की 10 टीमों ने घड़ियाल, मगरमच्छ और डॉल्फिन का सर्वे किया। सर्वे मुरोंग से लेकर चंबल, यमुना, क्वारी, सिंध और पाहुज नदियों के संगम पचनदा तक किया गया। सर्वे में खास बात यह निकलकर सामने आई कि अगस्त व सितंबर माह में दो बार आई बाढ़ के बाद भी घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई है।
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रिपोर्ट के अनुसार घड़ियालों की संख्या पिछले वर्ष 977 से बढ़कर 979 हो गई है। वहीं डॉल्फिन की संख्या 145 से बढ़कर 148 पहुंच गई है। हालांकि मगरमच्छ की संख्या 353 से घटकर 350 पाई गई। रेंजर कोटेश कुमार त्यागी ने बताया कि 10 टीमों को अलग-अलग हिस्सों में सर्वे की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मुरोंग से गढ़ायता, गढ़ायता से बरौली, बरौली से उदी पुल, उदी पुल से खेड़ा अजब सिंह, खेड़ा अजब सिंह से चिकनी, चिकनी से कसौआ, कसौआ से सहसों, सहसों पुल से महुआसूडा, महुआसूडा से भरेह संगम और भरेह से पचनदा तक मोटर बोट और पैदल गश्त की गई।

सर्वे के दौरान कोई भी जलीय जीव अस्वस्थ हालत में नहीं मिला। घड़ियाल और डॉल्फिन की संख्या बढ़ने से सेंक्चुअरी विभाग उत्साहित है। रेंजर ने कहा कि यह प्रारंभिक गणना है। फरवरी-मार्च में होने वाली गणना से वास्तविक और सटीक आंकड़े सामने आएंगे। उन्होंने बताया कि पचनद क्षेत्र जैवविविधता का अनूठा केंद्र बन चुका है। यहां प्रवासी पक्षियों के साथ जलीय जीवों के लिए सुरक्षित और अनुकूल आवास उपलब्ध है। मौसम में गर्माहट आते ही ये जलीय जीव तटों पर निकलकर दिखाई देते हैं। इसी उपयुक्त समय को देखते हुए गणना कराई गई। वन विभाग का दावा है कि संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक परिणाम मिल रहा है और चंबल का जलीय जीवन लगातार मजबूत हो रहा है।
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