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सदमे से किसान की गई जान

Tue, 14 Apr 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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रह-रह कर बरस रहे बदरा किसानों की धड़कनें बढ़ा रहे हैं। ओलावृष्टि तथा अतिवृष्टि से बर्बाद फसल के सदमे में एक और किसान चल बसा। आए दिन हो रही बारिश से किसान घबराया हुआ है।
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सिविल लाइन थाना क्षेत्र के इटगांव निवासी सांवलेराम कठेरिया (52) पुत्र कल्लू कठेरिया के नाम दस बीघा जमीन है। उसने अपने खेतों में गेहूं की फसल बोई थी। बारिश और ओलों से पूरी फसल बर्बाद हो गई थी, जिससे वह परेशान था। दो दिन पूर्व हुई बरसात से उसके खेतों में पानी भर गया।

उसे थोड़ा बहुल अनाज मिलने की उम्मीद थी, उस पर भी पानी फिर गया। मंगलवार की सुबह वह खेतों पर गया। फसल देख उसके सीने में दर्द उठा और वहीं गिर पड़ा। जानकारी मिलने पर ग्रामीण और परिजन मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक किसान की मौत हो चुकी थी।
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परिजनों ने बताया कि फसल खराब होने के कारण सदमे से मौत हुई है। जानकारी मिलने पर एसडीएम सदर महेंद्र कुमार सिंह मौके पर पहुंचे और घटना की जानकारी ली। उन्होंने बताया कि सांवलेराम काफी वृद्ध थे। उनकी मौत बीमारी के चलते हुई है।

मंगलवार की शाम को अचानक बारिश शुरू हो गई। करीब आधा घंटे की इस बारिश से किसान चिंतित हो उठे। किसान का कहना है कि बारिश अगर नहीं थमी तो खलिहान में पड़ा गेहूं सड़ जाएगा और किसान के हाथ कुछ नहीं लगेगा। इस बार मौसम किसानों को रह-रह कर दगा दे रहा है।

बीते दिनों हुई भारी बारिश और ओलावृष्टि ने जिले में जमकर तबाही मचाई थी। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है। अब किसान पूर्व में हुए नुकसान को भुलाकर खेतों में खड़ी गेहूं की फसल को काटने में जुटा है तो मौसम के बिगड़ते मिजाज ने किसानों को फिर से चिंता में डाल दिया है। सोमवार को भी जिले में बूंदाबांदी हुई। इसके बाद मंगलवार की शाम को अचानक आसमान में घिरे काले बादल बरस पड़े।

बारिश होते ही किसानों के चेहरों पर हवाइयां उड़ने लगीं। करीब आधा घंटे बाद बारिश थमी तो किसानों ने कुछ राहत महसूस की। बकेवर क्षेत्र के किसान अनिल तिवारी का कहना है कि पूर्व में हुई बारिश, ओलावृष्टि व तेज हवाओं के कारण फसलों को भारी नुकसान हुआ है। गेहूं और सरसों की फसल पूरी तरह से खेत में बिछ गई है।

किसानों ने गेहूं कटाई शुरू कर दी है। गेहूं अभी खलिहान में ही पड़ा है। बारिश होने से खलिहान में पड़े गेहूं के गट्ठर भीग रहे हैं। उनका कहना है कि मौसम साफ नहीं हुआ और ठीकठाक बारिश हो गई तो गेहूं खलिहान में ही पड़ा-पड़ा सड़ जाएगा।
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