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भक्ति करने वाला रहता है खुशहाल

Wed, 03 Jun 2015 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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‘संसार के समस्त विकल्पों को छोड़कर जो प्रभु की भक्ति करता है उसका जीवन खुशहाल हो जाता है। हमेशा के लिए रोना समाप्त हो जाता है।’ यह बात आचार्य श्री 108 विनम्र सागर जी महाराज ने भक्तामर शिविर में कही।
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आचार्य ने कहा कि जो भक्त भक्तामर का उच्चारण सच्चे मन से पढ़ता है वह एक दिन अजर-अमर पद को प्राप्त हो जाता है। मृत्यु पर विजय प्राप्त करके जिदंगी सुंदर व खुशहाल हो जाती है। कहा कि जिस मनुष्य में शक्ति नहीं होती फिर भी प्रभु की भक्ति करता है तो भगवान उसे शक्ति प्रदान कर देते हैं।

भक्ति से शक्ति को पैदा करो, शक्तिवान के गुणों की आराधना करने से हम भी शक्तिवान हो जाते हैं। आचार्य ने कहा कि भगवान की भक्ति सबसे बड़ा टॉनिक है। भगवान का भक्त अगर चार मंजिल से गिर जाए तो भी कुछ नहीं होता। यह भगवान की भक्ति का ही परिणाम है। 
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शिविर का शुभारंभ अध्यक्ष संजू जैन ने आचार्य श्री के पाद प्रछालन एवं शास्त्र भेंट कर किया। दीप प्रज्ज्वलन प्रदीप जैन ने किया। इस दौरान काफी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव पर उड़ा अबीर और गुलाल
इटावा। टिक्सी मंदिर के पास राजाराम की बगिया में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण सप्ताह ज्ञान यज्ञ में बुधवार को श्रीकृष्ण जन्मलीला हुई। सरस कथा वाचक पूरन महाराज ने भगवान के जन्म की कथा कही। प्रभु का जन्म होने पर ‘नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ गूंजने लगी। घंटा-घड़ियाल बजते रहे।

महिलाओं ने अबीर और गुलाल, टॉफियों एवं फूलों की वर्षा की। समूचा वातावरण भगवान के जन्मोत्सव पर उमंग और उल्लास में डूबा दिखा। इसी बीच भगवान के बाल रूप की झांकी प्रस्तुत की गई।

कन्हैया के इस स्वरूप को देखने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। कथा के दौरान परीक्षित रामानंद, रामशंकर, चंद्रप्रकाश, अरविंद, सोनू, मोनू, पंकज, सुरेश चंद्र, रमेशचंद्र, मनोहर आदि का सहयोग रहा।

उद्धव की गोकुल यात्रा ज्ञान व भक्ति का मिलन
इटावा। देवकीनंदन पार्क  चौगुर्जी में श्रीमद्भागवत  कथा  का रसास्वादन कराते हुए नैमिषाण्य से आए स्वामी महेशानंद ने कहा कि उद्धव जी की गोकुल यात्रा ज्ञान तथा भक्ति का अद्भुत मिलन है। भक्ति के अभाव में ज्ञान पंगु है।

भक्ति के लिए ज्ञान तथा वैराग्य परमावश्यक है। उन्हाेंने कहा कि भक्ति ज्ञान व ज्ञान भक्ति जब एक हो जाते हैं तभी जीवन का सार निकलता है। ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान के माध्यम से परमात्मा की प्राप्ति करना चाहता है लेकिन प्रेमी भक्तों को तो भगवान खुद  ही पकड़ लेते हैं।

न्यायशास्त्र का एक  उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि मर्कट ज्ञानी है और बिल्ली प्रेमी। बंदर का बच्चा अपनी मां को स्वयं पकड़ता है जबकि बिल्ली अपने बच्चे को पकड़ती है।

ज्ञानी व्यक्ति ज्ञान से भगवान को खोजता है जबकि प्रेमी जिज्ञासा, अनुराग, विश्वास से भगवान को प्राप्त करता है। आयोजक विवेक प्रकाश मिश्रा तथा मनीष प्रकाश मिश्रा ने भागवत जी की आरती की।
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