बुधवार को पहले दिन ही कई स्कूलों में जहां बच्चों को गर्म दूध पीने को मिला तो कइयों में इसकी शुरुआत तक नहीं हुई। भरथना नगर व देहात क्षेत्र के प्राथमिक व उच्च प्राइमरी विद्यालयों बच्चों को दूध पिलाने की व्यव्स्था लड़खड़ाई नजर आई।
कहीं दूधिए का इंतजार होते देखा गया तो कहीं अध्यापक को हाथों में बाल्टी को लेकर विद्यालय के आसपास गांवों में दूध तलाशते देखा गया।
भरथना देहात क्षेत्र स्थित पूर्व माध्यमिक स्कूल में मिड-डे मील के मीनू के हिसाब से कोफ्ते चावल तो बने थे लेकिन जब बच्चों को दूध देने के बारे में पूछा गया तो विद्यालय की इंचार्ज प्रधानाचार्य कल्पना ने बताया कि मास्टर साहब गांव में दूध लेने के लिए गए हैं। अभी आ रहे हैं।
इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय भरथना देहात में प्रिंसिपल दीप्ती ने बताया कि दूधिया से दूध मंगाया गया है। कोफ्ते, चावल तैयार हैं। प्राथमिक विघालय रमायन में पहुंची टीम ने देखा कि बच्चों का आज कोफ्ते चावल की जगह कढ़ी और चावल खिलाया जा रहा था। प्रिंसिपल नरेंद्र यादव ने बताया कि बच्चों को मिड डे मील के तहत भोजन दिया गया है।
प्राथमिक विद्यालय भोली के प्रिंसिपल आशुतोष यादव ने बताया कि आज नए मीनू के तहत भोजन दिया गया है। उधर दूध की व्यवस्था को लेकर टीचरों में आक्रोश दिखा।
ज्यादातर का कहना था कि न तो दूध के लिए विभाग ने उन्हें धन उपलब्ध कराया है और न ही सितंवर से कनर्वजन कास्ट का पैसा दिया गया है। टीचरों को अपनी जेब से पैसा लगाने के बाद भी दूध की समस्या से जूझना पड़ रहा है।
‘कन्वर्जन कास्ट बढ़े तो मिल सकेगा दूध’
इटावा। शासन के निर्देश पर 15 जुलाई से हर बुधवार को कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को दूध व कोफ्ता देने की योजना तो शुरू हो गई लेकिन इस पर टीचरों ने एतराज जताया है। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष बबुआ ठाकुर ने कहा कि पहले मिड-डे मील के तहत मिलने वाली कन्वर्जन कास्ट में बढ़ोत्तरी की जाए।
उसके बाद ही इसे लागू किया जाना चाहिए। श्री ठाकुर ने कहा कि शासन ने हर बुधवार को प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को कोफ्ता एवं प्रति बच्चा 200 मिलीग्राम उबला हुआ दूध देने के निर्देश दिए हैं लेकिन इसके लिए न तो कोई अलग से फंड मिला है और न ही मीनू को देखते हुए कन्वर्जन कास्ट में बढ़ोत्तरी की गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानाध्यापक किस मद के तहत बच्चों को दूध और कोफ्ता मुहैया कराएंगे जबकि शासन की नीति के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में मिड-डे मील का संचालन ग्राम प्रधान एवं शहरी क्षेत्रों में सभासद कर रहे हैं। वह लोग दूध व कोफ्ता मुहैया कराने में असमर्थता जता रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शासन ने इस वर्ष जो कन्वर्जन कास्ट बढ़ाई है, वह प्राथमिक स्तर पर 3.59 रुपये थी जिसे बढ़ाकर 3.89 रुपये किया गया है। महज 30 पैसे बढ़ाए गए। इसी तरह उच्च प्राथमिक में यह 5 रुपये से बढ़ाकर 5.77 रुपये हुई है। ऐसे में प्रधान, सभासद और प्रधानाध्यापक 30 और 77 पैसे में 200 एमएल दूध व कोफ्ता कैसे खिला पाएंगे।
जिलाध्यक्ष ने कहा कि इससे प्रधानाध्यापक मानसिक तनाव में हैं। शिक्षण कार्य भूल कर दूध और कोफ्ता के चक्कर में पड़े हैं। उन्होंने शासन व प्रशासन से मांग की कि इस योजना को सफल बनाने के लिए कन्वर्जन कास्ट बढ़ाई जाए या फिर दूध व कोफ्ता के लिए अलग से फंड दिया जाए।