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Etawah News: आशाओं के नेटवर्क से चोरी-छिपे चल रहा गर्भपात का खेल

Fri, 16 Oct 2026 11:44 PM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, इटावा
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फोटो 20: गर्भपात के बाद बंद पड़ा आरएन अस्पताल। संवाद - फोटो : चिकित्सक की दुकान पर लगी लोगों की भीड
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इटावा। शहर से लेकर ग्रामीण अंचलों तक स्वास्थ्य सेवाओं की आड़ में गर्भपात का खेल बेखौफ फल-फूल रहा है। स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी के चलते गली-मोहल्लों में संचालित जच्चा-बच्चा अस्पताल इस गैरकानूनी काम के मुख्य अड्डे बन गए हैं।
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इसकी सबसे मजबूत कड़ी ग्रामीण इलाकों में तैनात आशा कार्यकर्ता हैं, जो कमीशन के लालच में गर्भवती महिलाओं और उनके परिजन को आसानी से अपने जाल में फंसाकर इन अस्पतालों तक चोरी-छिपे तक पहुंचाती हैं। इसका ताजा उदाहरण बसरेहर की घटना है। इस घटना ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है, जहां शिकायत मिलने पर प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित डॉक्टर और आशा कार्यकर्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर क्लीनिक को सील कर दिया गया है।
यह कार्रवाई केवल एक बानगी है। जिले के कई अन्य कोनों में यह खेल आज भी बदस्तूर जारी है। मासूम जिंदगियों और महिलाओं के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाला यह सिस्टम सरकारी मशीनरी की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। ग्राम परौली रमाइन निवासी आलोक कुमार पत्नी शालिनी मिश्रा की 27 जून को तबीयत खराब हो गई थी।
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क्षेत्र की आशा शारदा देवी बेहतर उपचार का भरोसा दिलाकर उन्हें बसरेहर के आरएन अस्पताल लेकर पहुंची थी। यहां डॉ. राजेश कुमार ने आलोक कुमार व शालिनी की सहमति के बिना उसका गर्भपात कर दिया था। इससे उसकी हालत और बिगड़ गई थी। बाद में डॉक्टर ने गंभीर हालत बताकर उसे रेफर कर दिया था।
बाद में आलोक आलोक कुमार ने उसका ग्वालियर के निजी अस्पताल में इलाज करवाई थी। इसके बाद उसकी पत्नी की जान बच सकी। इस दौरान इलाज में आलोक कुमार के लाखों रुपये खर्च हो गए। आलोक कुमार की शिकायत पर स्वास्थ्य विभाग ने आरएन अस्पताल को सील कर दिया। साथ ही कोर्ट के आदेश पर डॉ. राजेश कुमार व आशा कार्यकर्ता शारदा देवी पर प्राथमिकी दर्ज की गई।
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बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी अस्पताल ले जाती आशा कार्यकर्ता
जिले में 1172 आशा कार्यकर्ता तैनात हैं। इन पर जिम्मेदारी होती है कि क्षेत्र के गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच कराएं। कुछ भी दिक्कत होने पर उन्हें पास के सीएचसी या जिला अस्पताल लेकर पहुंचें। इस दौरान कुछ आशा कार्यकर्ता थोड़े कमीशन के लालच में गर्भवती महिला व उसके परिजन को बेहतर इलाज का झांसा देकर अपनी सेटिंग वाले अस्पताल में ले जाती हैं।
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95 जच्चा-बच्चा अस्पताल हैं संचालित
जिले में 95 जच्चा-बच्चा पंजीकृत अस्पताल संचालित हैं। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्र में कई अवैध रूप से क्लीनिक संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग ने एक माह पहले महेवा क्षेत्र में करीब छह अवैध रूप से संचालित क्लीनिकों पर कार्रवाई की थी।
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गर्भपात की सूचना देने पर एक लाख रुपये का मिलता इनाम
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में किसी अस्पताल या क्लीनिक पर अगर गर्भपात किया जा रहा है। इसकी सूचना देने वाले मुखबिर को एक लाख रुपये का इनाम देने का नियम है। ऐसे लोग सीधे कार्यालय आकर शिकायत कर सकते हैं या पत्र भेजकर विभाग को सूचना दे सकते हैं। उनका नाम व पता गोपनीय रखा जाता है। शिकायत की बात सही निकलने पर उसे इनाम मिलता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार अभी तक गर्भपात मामले में कोई सूचना नहीं दी है।
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गर्भपात की शिकायत मिलने पर आरएन अस्पताल को सील कर डॉक्टर व आशा कार्यकर्ता पर कार्रवाई की गई है। समय-समय पर अस्पताल व अल्ट्रासाउंड केंद्र किए जाते हैं। गर्भपात होने की कहीं से शिकायत नहीं मिली है। अगर शिकायत मिलती है तो जिम्मेदार पर कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. अमित दीक्षित, डिप्टी सीएमओ व रजिस्ट्रेशन के नोडल अधिकारी

तीन से पांच हजार रुपये मिलता है कमीशन
निजी अस्पतालों में मरीजों को भर्ती कराने के एवज में आशा कार्यकर्ताओं को मोटा कमीशन मिलता है। जिले के कई निजी अस्पताल और नर्सिंग होम आशा कार्यकर्ताओं को प्रति मरीज या प्रसव पर दो से तीन हजार रुपये तक का कमीशन देते हैं। सामान्य मरीजों के मुकाबले आपरेशन मामलों में यह राशि पांच हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इसके अलावा गर्भपात का मरीज ले जाने पर एक से दो हजार रुपये मिलते हैं।
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