इटावा। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने सोमवार को बहला फुसलाकर ले जाने के बाद दुष्कर्म करने के दोषी व्यक्ति को दस साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर कुल 60 हजार रुपये अर्थदंड भी लगाया है। जिसमें 40 हजार रुपये पीड़िता को देने के आदेश दिए हैं।
राज्य की ओर से मामले के पैरवीकर्ता शासकीय अधिवक्ता दंड वीरेंद्र सिंह वर्मा ने बताया कि मामला फ्रेंड्स कालोनी थाना क्षेत्र का है। इसी थाना क्षेत्र के दतावली गांव निवासी शिवम पुत्र राधेश्याम राठौर को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक की न्यायाधीश रेनू सिंह ने धारा 366 व 376 में दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
मूल रूप से फिरोजाबाद जिले के सिरसागंज की रहने वाली पीड़ित युवती उक्त थाना क्षेत्र के एक गांव में किराए पर रह रही थी। पीड़िता ने फ्रेंड्स कालोनी थाना में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 4 अक्तूबर 2016 को उसकी पुत्री को शिवम बहला फुसलाकर ले गया था और दुष्कर्म किया था। पीड़िता के बयान व मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर थाना पुलिस ने शिवम के खिलाफ धारा 366, 376 व 363 के तहत मामला दर्ज कर कोर्ट में आरोपपत्र प्रस्तुत किया था।
फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या एक की न्यायाधीश ने सरकारी व बचाव पक्ष के वकीलों की दलीलें सुनने के बाद सोमवार को साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर शिवम को धारा 366 व 376 को दोषी पाया। जबकि धारा 363 के आरोप से मुक्त कर दिया। कोर्ट ने उसे उक्त दोनों धाराओं में दस दस साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई। दोनों सजाएं एक साथ चलेंगी। उस पर कुल 60 हजार रुपये अर्थदंड लगाया। जिसमें से 40 हजार रुपये पीड़िता को प्रतिकर के रूप में प्रदान करने के आदेश दिए।
विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के आदेश
शासकीय अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह वर्मा ने बताया कि कोर्ट ने इस मामले में विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के भी आदेश दिए हैं। अधिवक्ता वीरेंद्र सिंह वर्मा ने बताया कि डाक्टर ने पीड़िता के सैंपल एकत्रित किए थे, लेकिन विवेचक ने यह डीएनए सैंपल जांच के लिए फोरेंसिक लैब में नहीं भेजे। कोर्ट ने माना कि यह अत्यंत गंभीर त्रुटि की गई। विवेचक ने अभियुक्त को लाभ पहुंचाने के लिए डीएनए परीक्षण नहीं कराया। विवेचक ने दुष्कर्म जैसे अत्यंत जघन्य अपराध में गंभीर लापरवाही बरती। कोर्ट ने अभियोजन अधिकारी को आदेशित किया कि वह तत्कालीन विवेचक के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखे, जिससे भविष्य में ऐसे जघन्य अपराधों में विवेचक लापरवाही न करें।