इटावा/ऊसराहार। डेंगू का डंक लगातार लोगों को बीमार कर रहा है। ताखा ब्लॉक के ग्राम विकास अधिकारी को डेंगू की पुष्टि हुई है और जिला अस्पताल की पैथालॉजी की जांच में सोमवार को तीन मरीजों में डेंगू के प्राथमिक लक्षण मिले। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग सतर्कता नहीं बरत रहा है। जिला प्रशासन के निर्देश के बावजूद जिला अस्पताल में डेंगू वार्ड में बेड नहीं बढ़ाए गए हैं। जिले में करीब 13 लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी है।
ताखा ब्लॉक के वीडीओ शिवम कुमार गुुरुवार को बुखार की चपेट में आ गए। परिवार के लोगों ने उन्हें शुक्रवार को इटावा के निजी अस्पताल में दिखाया, जहां डॉक्टरों ने डेंगू बताकर भर्ती कर लिया। एडीओ पंचायत ताखा देवेंद्र कुमार ने बताया शिवम डेंगू बुखार से पीड़ित है और अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र भेजा है। ग्राम पंचायत मोहरी के वीडीओ भुवनेश कुमार भी डेंगू बुखार से ग्रसित हो चुके हैं। ब्लॉक क्षेत्र में कई लोग डेंगू की चपेट में आ चुके हैं, लेकिन गांवों में एंटी लार्वा का छिड़काव नहीं कराया जा रहा है। उधर, जिला अस्पताल की पैथालॉजी में सोमवार को 24 बुखार मरीजों ने डेंगू की जांच कराई। इसमें शहर के मोहल्ला कोकपुरा निवासी मोहन, मोहल्ला मालिन टोला निवासी अर्शी और नगला नायक गांव निवासी त्रिशा में डेंगू के प्राथमिक लक्षण मिले।
परिवार के लोग मरीजों को निजी अस्पतालों में ले गए। जिला अस्पताल में सितंबर से 18 नवंबर तक 400 से अधिक बुखार मरीजों ने जांच कराई। इसमें करीब 100 मरीजों में डेंगू के प्राथमिक लक्षण मिल चुके हैं। शहर, भरथना, ऊसराहार, जसवंतनगर और बलरई क्षेत्र में डेंगू से 13 लोगों की मौत हो चुकी है।
डेंगू की भयावहता देखते हुए एडीएम ज्ञान प्रकाश श्रीवास्तव ने शनिवार को कलक्ट्रेट सभाकक्ष में स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़े अधिकारियों के साथ बैठक ली थी। इसमें स्वास्थ्य विभाग को जिला अस्पताल के डेंगू वार्ड में 10 बेड करने के निर्देश दिए गए थे। जिला अस्पताल के तृतीय तल पर छह बेड का डेंगू वार्ड बना है। उसी में चार बेड बढ़ाए जाने हैं, लेकिन तीन दिन में अधिकारी वार्ड में चार बेड नहीं बढ़ा पाए हैं। इस वार्ड में अक्तूबर से 15 नवंबर तक 35 मरीज भर्ती हो चुके हैं। सुविधाओं की कमी के कारण ज्यादातर मरीज दूसरे या तीसरे दिन सैफई पीजीआई या आगरा के अस्पताल चले गए। सीएमएस डा.एसएस भदौरिया ने बताया कि अवकाश से लौटे हैं, एक दो दिन में वार्ड में बेड बढ़वा दिए जाएंगे। बताया कि जिला अस्पताल में पैरासीटामाल की एक लाख से ज्यादा टेबलेट हैं। इन दवाओं से सप्ताह भर काम चल सकता है। और दवा मंगाने के लिए पत्र लिखा जा रहा है। पौथालॉजी में डेंगू जांच के लिए पर्याप्त किट मौजूद हैं।