लखना नगर में श्री रामलीला समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला महोत्सव के दसवें दिवस श्री रामलीला कला मंच के कलाकारों ने सूर्पणखा मान भंग और खर-दूषण वध की लीला का मंचन किया। जिसे देखने के लिए भारी जन समुदाय उमड़ा।
श्री रामलीला महोत्सव में भरत मिलाप होने के बाद श्री राम अपने भाई लक्ष्मण व सीता जी के साथ पंचवटी में निवास करने के लिए जाते हैं। जहां इंद्र पुत्र जंयत को शंका होती है कि राम विष्णु अवतार नहीं बल्कि साधारण पुरुष है। इसी शंका का समाधान के उद्देश्य से वह कौवा के भेष में सीता जी के चरण में अपनी चोंच का प्रहार कर भागता है।
जिस पर श्री राम उस पर अग्नि बाण चलाते हैं। अग्नि बाण से प्राण जाने के भय से जयंत तीनों लोको में भागता फिरता है। अंत में देव ऋषि जयंत को राम जी की शरण में जाने को कहते हैं। इस लीला के पश्चात कलाकारों ने सूर्पणखा मान भंग की लीला का मंचन किया।