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रोमानिया, पौलेंड, हंगरी पहुंचे छात्र, अब फ्लाइट का इंतजार

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इटावा। यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई करने गए इटावा जिले के 10 से अधिक छात्र अभी भी वतन वापसी की बाट जोह रहे हैं। हालांकि ये छात्र स्थानीय परामर्शदाता और ट्रांसपोर्टरों की मदद से रोमानिया, पोलैंड और हंगरी तक पहुंच गए हैं।
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कुछ छात्र रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट तक भारतीय शिविरों में पहुंच गए हैं और कुछ छात्र अभी नजदीकी देशों के बार्डर पर पहुंचने के लिए सफर कर रहे हैं।
छात्रों की ओर से अपने माता-पिता को जो सूचनाएं दी गईं हैं, उससे परिजनों के चिंता के बादल थोड़े से छंट गए हैं। परिजनों को उम्मीद बंध गई है कि अब जल्दी ही उनके नौनिहाल घर पहुंच जाएंगे।
इटावा शहर के लालपुरा निवासी रोहन यादव के पिता धीरेंद्र यादव और शहर के ही अड्डा ऊसरा निवासी आशुतोष कुशवाहा के पिता विमल कुशवाहा ने बताया कि दोनों छात्र डेनप्रो से निकलकर हंगरी बार्डर पर पहुंचने वाले हैं।
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भारतीय छात्रों का एक समूह वहां के स्थानीय परामर्शदाता और ट्रांसपोर्टर की मदद से 1400 किमी की यात्रा करके हंगरी बार्डर पर पहुंच रहे हैं।
विमल कुशवाहा ने बताया कि रोहन और आशुतोष दोनों ही एमबीबीएस थर्ड ईयर के छात्र हैं। तीन बसों में भारतीय छात्र वहां से निकले हैं।
बसों में तिरंगा लगा होने की वजह से उन्हें किसी ने नहीं रोका। हालांकि एक स्थान पर कई हेलिकॉप्टर उड़ान भर रहे थे, उस दौरान जरूर सभी छात्र डर गए थे।
विमल कुशवाहा ने बताया कि वहां से निकलने के लिए सभी छात्रों को प्रति छात्र लगभग साढ़े नौ-नौ हजार रुपये भुगतान करना पड़ा है।
इटावा शहर स्थित झम्मनलाल की कलारी निवासी पल्लवी भी डेनप्रो से ही एमबीबीएस की छात्र है। पल्लवी के पिता डा. पीके शर्मा ने बताया कि उनकी बेटी भी मंगलवार शाम से ही निकली है।
उससे बात नहीं हो पा रही है, सिर्फ मैसेज से पता चल रहा है। सभी के फोन सुरक्षा की दृष्टि से बंद करवा दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि पहले बेटी ने बताया था कि वह हंगरी जा रही है, बाद में बताया कि वे लोग रोमानिया जा रहे हैं।
डा. शर्मा ने बताया कि स्थिति स्पष्ट न होने की वजह से वे बेहद चिंतित हैं। उन्होंने बताया कि ट्रांसपोर्टरों ने बार्डर तक पहुंचाने के लिए बस का 200 डॉलर चार्ज लिया है।
इटावा शहर के आलमपुरा निवासी इदरीश ने बताया कि उनका बेटा अर्सलान और उनके साले पुरविया टोला निवासी तनवीर की बेटी समन सीरीन खारकीव से ट्रेन से लबीब पहुंच गए हैं।
ये दोनों खारकीव से मंगलवार शाम को पांच बजे चले थे। लगभग 20 घंटे की यात्रा के बाद दोनों लबीब पहुंच गए हैं।
यहां पर लगभग दो घंटे के अंतराल के बाद दोनों बस से पौलेंड के लिए निकल गए हैं। उसे ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
बकेवर संवाद के अनुसार कस्बे के आजाद नगर निवासी मनोज पाठक का बेटा शुभ रोमानिया पहुंच गया है। फ्लाइट अभी तक न मिल पाने के कारण परिजनों को काफी चिंता हो रही है।
शुभ ने बताया कि यहां छात्रों की संख्या काफी है। फ्लाइट कम होने की वजह से समय लग रहा है। उन लोगों को कब फ्लाइट मिलेगी इस बारे में अभी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
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