इटावा। कोरोना काल में स्कूल कालेज बंद होने के बाद शुरू हुई ऑनलाइन पढ़ाई से अभी भी छात्र-छात्राओं का पीछा नहीं छूटा है। यूपी बोर्ड तथा सीबीएसई के विद्यालयों को बंद करने के बाद शुरू की गई यह पढ़ाई अभिभावकों को भी रास नहीं आ रही है।
अभिभावकों का कहना है कि इससे बच्चों की दिनचर्या बिगड़ रही है। मोबाइल से काम करने की लत आगे चलकर दिक्कत बन सकती है। ऑनलाइन शिक्षा में वह बात नहीं है, जो क्लास में बैठकर पढ़ने से आती है।
पूरे दिन पढ़ाई करते रहो परंतु पढ़ाई की फीलिंग नहीं आती। दो साल से स्कूल-कालेज खुलने पर ग्रहण लगा हुआ है। कभी खुलते हैं तो कभी बंद हो जाते हैं। पढ़ाई लिखायी ढर्रे पर नहीं आ पा रही है।
अभी किसी को नहीं मालूम ऑनलाइन पढ़ाई कितने दिनों तक चलेगी। ज्यादातर विद्यालयों में बच्चे आनलाइन पढ़ाई से जुड़े हैं। हकीकत यह है कि इस पढ़ाई से न बच्चे संतुष्ट हैं और न ही अभिभावक।
बच्चों का साफ कहना है कि कक्षा में बैठकर जो पढ़ाई होती है, उसका कोई मुकाबला नहीं है। कोरोना के कारण मजबूरी में ऑनलाइन पढ़ाई करनी पड़ रही है। अब विद्यालयों को छह फरवरी तक बंद कर दिया गया है।
इस दौरान ऑनलाइन पढ़ाई चलती रहेगी। ऑनलाइन पढ़ाई बच्चों और अभिभावकों के सामने कई कठिनाइयां आ रही हैं। छात्र तनु ऋषीश्वर का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई शहरी क्षेत्रों में सही है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के लिए किसी सिरदर्द से कम नहीं है।
नेटवर्क आता नहीं नेट की स्पीड भी स्लो होती है। कभी आवाज गायब हो जाती है, तो कभी तस्वीर हैंग हो जाती है। शिक्षक ऑनलाइन होते हैं, तब बच्चों को नेटवर्क नहीं मिलता और जब बच्चे आते हैं तब शिक्षक ऑनलाइन नहीं रह पाते।
प्रियांशु का कहना है कि विद्यालय बंद होते होते समय बीत गया है। अब तो ऑनलाइन पढ़ाई बोरिंग लगने लगी है। न तो ठीक से कुछ समझ में आता है और न ही नेटवर्क सही आता है।
पढ़ाई तो सिर्फ नाम के लिए ही हो पा रही है। ऋतिक का कहना है कि ऑनलाइन पढ़ाई करना तो मजबूरी है। क्लास में बैठकर पढ़ने की बात ही और है। ऑनलाइन पढ़ाई पब्लिक स्कूलों में तो हो रही, परंतु सरकारी विद्यालयों के बच्चों की भी फिक्र करनी चाहिए।
छोटू गुप्ता का कहना है कि नेटवर्क की गड़बड़ी से ऑनलाइन पढ़ाई ढर्रे पर नहीं आ पा रही है। अब सरकार को जल्द ही विद्यालयों में पठन पाठन शुरू कराने के उपायों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।