इटावा। बेसिक शिक्षा परिषद, यूपी बोर्ड एवं सीबीएसई से संबद्ध माध्यमिक विद्यालयों के छात्र-छात्राएं अब आपदा प्रबंधन के गुर सीखेंगे। कालेज में किसी प्रकार की आपदा आने पर छात्र ही एक दूसरे की मदद करेंगे। शासन ने सभी विद्यालयों में आपदा प्रबंधन का मुख्यमंत्री स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम लागू किया है। इसके लिए जिला स्तर पर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में आपदा प्रबंध प्राधिकरण का गठन भी कर दिया गया है। यह योजना जिले भर के 50 विद्यालयों में लागू होगी।
मुख्यमंत्री सुरक्षा कार्यक्रम के अंतर्गत प्रदेश स्तर से एजेंसी का चयन किया जाएगा। यह एजेंसी सभी विद्यालयों में इस कार्यक्रम को लागू कराएगी। पहले चरण में बेसिक शिक्षा परिषद के 25 एवं माध्यमिक शिक्षा सीबीएसई के 25, कुल 50 विद्यालयों के छात्र छात्राओं को आपदा प्रबंधन के तौर तरीके सिखाये जाएंगे। चयनित एजेंसी जिले के 10 प्रशिक्षकों को तीन दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण देगी। इसके बाद प्रशिक्षित अध्यापक चयनित किए गए विद्यालयों के 50 विद्यार्थियों को प्रशिक्षित करेंगे। प्रत्येक विद्यालय का आपदा प्रबंधन योजना एवं बेसिक सेफ्टी आडिट किया जाएगा। इस आडिट का उद्देश्य विद्यालय को आपदाओं के प्रति सुदृढ़ बनाने के लिए उपायों का सुझाव देना है। इसके बाद प्रत्येक विद्यालय में एक दिवसीय माकड्रिल होगा। आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण देने के लिए एप के माध्यम से विभिन्न शार्ट फिल्में बनाकर जागरूकता का प्रचार प्रसार किया जाएगा।
घर से विद्यालय तथा विद्यालय से घर वापसी तक बच्चों को सुरक्षित वातावरण तैयार करने के लिए स्कूल सुरक्षा कार्यक्रम लागू किया जा रहा है। इसमें जलवायु संबंधी श्रोत से बड़े पैमाने पर होने वाली प्राकृतिक आपदायें, मानव निर्मित संकट, महामारी, हिंसा, छोटे पैमाने पर होने वाले अग्निकांड, यातायात सबंधी जानकारी, पर्यावरण के खतरे एवं आपातकालीन घटनाएं, जो बच्चों के जीवन को विपरीत रूप से प्रभावित कर सकती हैं। उनसे बचाव एवं सुरक्षा के तौर तरीकों के बारे में बारीकी से समझाया जाएगा।
ये सुझाव दिए जाएंगे
अभियान के दौरान प्रत्येक शिक्षण संस्था में प्रधानाचार्य आफिस में दमकल विभाग का नंबर उपलब्ध हो, विद्यालय में अन्य सभी महत्वपूर्ण कर्मचारियों का नंबर सबको पता हो, अगर आपके कपड़ों में आग लगी हो तो कभी भी न दौड़ें, जमीन पर रोल कर आग बुझाने की कोशिश करें, जैसे सुझाव दिए जाएंगे।
- जिला विद्यालय निरीक्षक राजू राणा ने बताया कि विद्यालय सुरक्षा के सहयोग के लिए केंद्रीय भूमिका में शिक्षकों के अतिरिक्त सभी शिक्षकों को इस संबंध में संवेदनशील बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि सभी प्रधानाचार्य अपने अपने विद्यालयों में आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण कराएं। इससे आने वाले समय में विद्यालय का वातावरण अधिक सुरक्षित होगा।