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पंचायत चुनाव परिणाम, 2022 में भाजपा के लिए खतरे की घंटी

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जिला पंचायत में सपा का 32 वर्ष से कब्जा है और अगला अध्यक्ष भी सपा से होगा यह चुनाव के नतीजों ने तय कर दिया है। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में दो सीटों और 2019 में इटावा संसदीय क्षेत्र फतह करने वाली भाजपा केवल एक जिला पंचायत सदस्य ही जिता पाई है।
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इससे अध्यक्ष पद पर काबिज होने का उसका सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है। नतीजों ने सपा और प्रसपा गठबंधन का रास्ता जरूर खोल दिया है। जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में दोनों दलों के गठजोड़ ने भाजपा को पटखनी देने में अहम भूमिका निभाई है।
चुनाव प्रचार के समय प्रसपा अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने भी चुनावों के बाद परिवार में एका के संकेत दिए थे।
जिला पंचायत वर्ष 1989 से सपा का कब्जा है। 89 में सपा के प्रो रामगोपाल यादव जिला पंचायत अध्यक्ष बने थे। इसके बाद शिवपाल के अलावा सपा के ही अध्यक्ष रहे। 2006 में सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई राजपाल सिंह यादव की पत्नी प्रेमलता यादव जीतीं।
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उन्होंने दो कार्यकाल पूरे गए। के बाद वर्ष 2016 में उनके बेटे अभिषेक यादव उर्फ अंशुल जिला पंचायत अध्यक्ष बने। इस बार भी जिला पंचायत सदस्यों पद पर सपा ने अंशुल की अगुवाई में चुनाव लड़ा था।
सपा से अध्यक्ष का पद छीनने के लिए भाजपा ने भी पूरा जोर लगाया। सभी 24 सीटों पर उम्मीदवार उतरे, सांसद, विधायक ने प्रचार किया लेकिन केवल एक सीट ही पार्टी जीत पाई।
948425 मतदाताओं में 692350 वोट डाले। 73 फीसदी मतदान हुआ। सपा-प्रसपा जीत को गई लेकिन उसे वोट केवल 30 प्रतिशत ही मिले। भाजपा को इससे भी आधे वोट मिले। कांग्रेस और बसपा की प्रतिशत इससे भी कम रहा।
अंशुल यादव ने कहा कि पंचायत चुनाव में इटावा की जनता ने भाजपा को नकार दिया है। 2022 विधानसभा चुनाव में उसका इससे बुरा हाल होगा। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में सपा प्रसपा के गठबंधन पर फैसला राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव लेंगे। हां पंचायत चुनाव के नतीजे विधानसभा चुनाव पर नजर जरूर डालेंगे।
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