मुख्यमंत्री के जिले में अग्निशमन विभाग की हालत दयनीय है। इसकी बदहाली दूर करने के लिए विभागीय अधिकारी शासन को कई प्रस्ताव भेज चुके हैं, जो रद्दी की टोकरी में चले गए, लेकिन अगर जनप्रतिनिधि चाहें तो पब्लिक के साथ-साथ अग्निशमन विभाग का भी भला हो सकता है।
जिले के सांसद-विधायक अपनी निधि से दमकल की गाड़ी खरीदकर अग्निशमन विभाग को दे सकते हैं। हर साल एक विधायक को दो करोड़ रुपये की निधि प्राप्त होती है। इसमें 25 लाख रुपये फायर सर्विस के नाम पर खर्च करना कोई बड़ी बात नहीं है। अगर ऐसा हो जाए तो जिले में तीन विधायक और एक सांसद हैं, यानी चार दमकल आसानी से खरीदी जा सकती हैं।
लोगों का कहना है कि अग्निकांड की घटनाओं के बाद सांसद और विधायक शोक संवेदनाएं व्यक्त करने के लिए पीड़ित के दरवाजे पर पहुंच जाते हैं। इनकी संवेदनाओं से पीड़ित के नुकसान की भरपाई होना संभव नहीं है। पब्लिक के लिए संवेदनाएं नहीं, बल्कि संसाधन जरूरी है, क्योंकि जब अग्निशमन विभाग के पास संसाधन बढ़ेंगे तो अग्निकांड की घटनाओं पर नियंत्रण रखने में भी वह सक्षम होगा।
मुख्यमंत्री के जिले में फायर सर्विस के नाम पर सिर्फ तीन दमकल गाड़ियां है। एक गाड़ी वीआईपी ड्यूटी पर रहती है। सीमित संसाधनों में अग्निकांड की बड़ी वारदातों पर अंकुश पाने में विभाग को पसीना छूटता है। कई बार विभागीय अफसर शासन से दमकल की गाड़ियों को लेकर मांग कर चुके हैं, लेकिन आज तक उनकी मांग पूरी नहीं हुई है। गाड़ी कम होने से ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निकांड की घटनाएं भयावह रूप ले लेती हैं।
जिला मुख्यालय से गाड़ी जब तक पहुंचती है, आग में सब कुछ स्वाहा हो चुका होता है। अगर तहसील स्तर पर दमकल की तैनाती हो जाए तो अग्निकांड में होने वाले नुकसान को रोका जा सकता है। जिले में छह तहसीलें हैं। इस हिसाब से तीन दमकल की और जरूरत है। अगर जिले का हर विधायक अपनी-अपनी निधि से एक-एक दमकल दे दे तो जिले की फायर सर्विस हर खतरे से जूझने के लिए पूरी तरह से तैयार हो जाएगी।
सीएफओ शिवदयाल शर्मा बताते हैं कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की ओर से घोषणा की गई है कि अगर विधायक चाहें तो अपनी निधि से फायर टेंडर की खरीद के लिए 25 लाख रुपये दे सकते हैं। इस घोषणा के बाद प्रतापगढ़ के एक विधायक ने वहां फायर टेंडर खरीद के लिए 25 लाख रुपये दिए भी हैं। अगर स्थानीय विधायक और सांसद मदद कर दें तो फायर सर्विस की दशा सुधर सकती है, क्योंकि संसाधन के अभाव में चाहकर भी पब्लिक की पर्याप्त मदद नहीं हो पाती है।
इटावा जिले में तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से शिवपाल सिंह यादव विधायक हैं। वह सपा के कद्दावर नेता होने के साथ ही प्रदेश सरकार में भी दूसरे नंबर का स्थान रखते हैं। अगर उनकी नजरें इनायत हो जाएं तो फायर सर्विस की दशा पल भर में सुधर सकती है। अब बात करते हैं भरथना विधायक सुखदेवी वर्मा की। इनको कई फोन किए गए, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।
इस बाबत सदर विधायक रघुराज सिंह शाक्य का कहना है कि इस तरह की कोई गाइड लाइन नहीं है, जिसके तहत फायर सर्विस को मदद दी जाए। अगर इस तरह की कोई व्यवस्था है तो इसके बारे में जानकारी की जाएगी और शासन स्तर पर भी प्रयास करेंगे कि जिले को फायर टेंडर मिल जाएं। निधि से भी फायर टेंडर खरीदकर देने में पीछे नहीं हटेंगे।