गरीबों को आवास मुहैया कराने की ‘आसरा’ योजना जिले में धन की कमी की भेंट
चढ़ रही है। शासन से मिली पहली किस्त की रकम से आवासों का ढांचा तो तैयार
कर दिया गया, लेकिन रकम उपभोग की फाइल न भेजने से सूड़ा ने दूसरी किस्त
जारी नहीं की। डूडा के अफसरों की लापरवाही से फाइल पांच महीने से विभागीय
दफ्तर में ही पड़ी है।
जानकारों का कहना है कि निर्माण कार्य में पांच
महीने का समय काफी लंबा पीरियड होता है। आज के समय निर्माण कार्य महंगा हो
चुका है। ऐसे में दूसरी किस्त से निर्माण कार्य पूर्ण हो पाए यह संभव नहीं
दिखता। इस योजना के तहत शहर के फोरलेन बाईपास के निकट कुशभा गांव में
108 आवास बनाए जा रहे हैं।
यह योजना वर्ष 2012-13 में शुरू हुई। प्रस्तावित
लागत 319.68 लाख रुपये रखी गई। शासन ने गत वर्ष जनवरी माह में पहली किस्त
के रूप में 159.84 लाख रुपये कार्यदायी संस्था कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन
सर्विसेस (सीएनडीएस) को दे दी। कार्यदायी संस्था ने सभी 108 आवासों का
ढांचा तैयार कर दिया।
अगस्त के महीने में डूडा विभाग को पहली किस्त की रकम
का उपभोग कर लिए जाने की फाइल भी भेज दी। यह फाइल डीएम के हस्ताक्षर के बाद
डूडा से सूडा उपभोग प्रमाणपत्र हासिल करने को भेजी जानी है। जिसके बाद ही
सूडा से दूसरी किस्त की रकम मिलनी है। लेकिन पांच महीने गुजरने के बाद अब
तक यह फाइल डूडा स्तर पर ही अटकी पड़ी हुई है।
इस हीलाहवाली के चलते यह
योजना अधूरी पड़ी है। यही नहीं, योजना के क्रियान्वयन में हुई देरी की वजह
से इसकी लागत में भी बढ़ोत्तरी हुई है। उधर गरीब आस लगाए बैठे हैं कि आवास
बनकर तैयार हों तो उन्हें पक्की छत मुहैया हो सके। मगर जिले स्तर पर इस
योजना को लेकर जो रफ्तार दिख रही है उससे अभी एक डेढ़ साल तक गरीबों को
आवास मिलने के आसार नजर नहीं आ रहे।
अक्टूबर में यहां
ज्वाइन करने के बाद इस योजना के बारे में जानकारी की तो पता चला कि उपभोग
प्रमाणपत्र की फाइल पर डीएम के हस्ताक्षर होने हैं। फिलहाल डीएम ने निर्माण
कार्य के सत्यापन के लिए टीम बनाई है। उसकी रिपोर्ट मिलने के बाद इस फाइल
को सूडा भेज दिया जाएगा।-मिथलेश अवस्थी, पीओ, डूडा, इटावा