जैन समाज की प्राचीन प्रथा संथारा पर राजस्थान
हाईकोर्ट के निर्णय से इटावा का जैन समाज आहत है। समाज के लोगों ने कहा कि
चोट हमारे शरीर पर लगती तो और बात थी, लेकिन यह चोट हमारी आस्था एवं धर्म
पर है। हाईकोर्ट को इस पर पुन: विचार करना चाहिए।
सोमवार को सुबह
10 बजे श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर एवं श्री दिगंबर जैन मंदिर नया
शहर से समाज के लोग संथारा के समर्थन में हाथों में जैन ध्वज लेकर निकले।
नौरंगाबाद चौराहा पर एकजुट होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के साथ कचहरी की ओर
रुख किया। मांग की कि संथारा पर लगी रोक हटाई जाए।
कोर्ट के निर्णय
पर पुनर्विचार होना चाहिए। करीब चार सौ से अधिक समाज के लोगों ने कचहरी
पहुंचकर राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन डीएम नितिन बंसल को सौंपा। इसके बाद
वट वृक्ष के नीचे एकत्र होकर संथारा पर लगी रोक हटाने की मांग की।
नशिया
जी कमेटी के अध्यक्ष संजू जैन ठेकेदार ने कहा कि युगों से चले आ रहे आत्म
कल्याण के मार्ग संथारा को आत्महत्या या सती प्रथा से तुलना कर उसे अपराध
की श्रेणी से जोड़ना गलत है। महामंत्री आकाशदीप जैन ने कहा कि संधारा पर
रोक लगाकर संथारा लेने वाले एवं उसे प्रेरणा देने वालों पर आपराधिक प्रकरण
दर्ज करने का निर्णय जैन समाज की धार्मिक स्वतंत्रता पर कुठाराघात है।
दिगंबर
जैन विकास समिति के अध्यक्ष सुदर्शन जैन ने कहा कि संधारा स्वयं की इच्छा
से गुरु भगवंत, श्रीसंघ की साक्षी से किया जाता है। संथारा को तपस्या का
स्वर्ण कलश भी कहा गया है।
ज्ञापन सौंपने वालों में संजू जैन, महेश
जैन रपरिया, चंद्रप्रकाश जैन, राकेश कुमार जैन, पीडी जैन, राकेश जैन,
चक्रेश जैन, मनोज जैन, देवेंद्र जैन, शैलेश जैन, पूरन जैन, बोनू जैन, दीपू
जैन मौजूद रहे।