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सपा के लिए संजीवनी रही लखना सीट

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निवाड़ीकला। लखना सुरक्षित सीट परिसीमन के बाद अब सिर्फ इतिहास बनकर रह गई है। नई पीढ़ी इस विधानसभा सीट को जानती तक नहीं है। वर्ष 2012 में इस सीट को खत्म करके भरथना विधानसभा क्षेत्र से जोड़ दिया गया।
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वर्ष 1962 में इस सीट पर पहली बार विधानसभा चुनाव हुए थे। कांग्रेस के घासीराम ने सोशलिस्ट पार्टी के रंगीलाल को 4,542 मतों से पराजित किया था। यह सीट कांग्रेस के लिए काफी संघर्षशील रही। कांग्रेस ने यहां दो बार और भाजपा ने एक बार जीत हासिल की।
सपा ने वर्ष 1993 से 2002 तक इस सीट पर कब्जा बरकरार रखा। वर्ष 2007 में इस सीट पर पहली बार बसपा के भीमराव अंबेडकर (अब एमएलसी है ) ने सपा की सुखदेवी वर्मा को 6,870 मतों से पराजित किया।
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प्रदेश में बसपा की सरकार बनी तो लखना विधानसभा सीट के लिए यह आखिरी चुनाव रहा। 13 विधानसभा चुनाव का इतिहास लिखने वाली लखना ने 1989 में गयाप्रसाद वर्मा के रूप में प्रदेश को सहकारिता मंत्री दिया था। उन दिनों जनता दल से मुलायम सिंह मुख्यमंत्री हुआ करते थे।
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ये बने थे विधायक
वर्ष निर्वाचित विधायक दल
1962 घासीराम कांग्रेस
1967 के.लाल सोशलिस्ट पार्टी
1969 घासीराम कांग्रेस
1974 राम लखन भारतीय जनसंघ
1977 राम लखन जनता पार्टी
1980 महारानी दोहरे कांग्रेस
1985 गयाप्रसाद वर्मा लोकदल
1989 गयाप्रसाद वर्मा जनता दल
1991 केके राज भाजपा
1993 सुखदेवी वर्मा सपा
1996 सुखदेवी वर्मा सपा
2002 सुखदेवी वर्मा सपा
2007 भीमराव आंबेडकर बीएसपी
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