आशा व कामनाओं से रहित व्यक्ति ही सच्चा बैरागी है। यदि बैरागी बनकर संत दलाली करेंगे तो निश्चित ही धर्म तथा समाज को आघात पहुंचेगा। इसके साथ-साथ निकट भविष्य के लिये यह घातक सिद्घ होगा। इसलिए संत मर्यादाओं में रहकर धर्म की रक्षा करने के साथ समाज तथा देश का कल्याण करने की भी सोचें।
यह उद्गार रक्षाबंधन पर हनुमान मंदिर नगला केहरी के पुजारी सत्यानंद महाराज ने भक्तों से कही। श्री सत्यानंद महाराज ने कहा कि संतों की अपनी मर्यादा तथा सीमाएं होती है। संत यदि अपनी मर्यादाओं का पालन करके अपनी सीमा के अंदर रहता है तो धर्म और समाज को एक नई दिशा मिलती है।
यदि संत इसके विपरीत कार्य करता है तो समाज में उसकी मान मर्यादा कम होती है। उन्होंने कहा कि संत धर्म तथा समाज का सजग प्रहरी होता है। उन्होंने कहा कि यदि संत त्याग की भावनाओं को भूलकर भौतिक सुख संसाधनों की कामना करने लगेगा तो वह धर्म तथा समाज का कल्याण कैसे कर सकते हैं।
श्री सत्यानंद महाराज का सुनील यादव, सुपदेश यादव, रामपाल यादव, मेजर लाठी ,संतोष कुमार, अनुज कुमार, नीरज यादव, मोहित यादव, प्रेम सिंह यादव, हृदयराम यादव, पहुंचीलाल यादव, श्याम सिंह यादव, अरविंद कुमार, अशोक यादव सहित सैकड़ों भक्तों ने माल्यार्पण कर उनसे आशीर्वाद लिया। वहीं रामवीर यादव ने महाराज को पगड़ी पहनाकर उनका स्वागत किया।