वह दिन दूर नहीं जब सैफई की हवाई पट्टी से लड़ाकू
विमान भी उड़ान भरने लगेंगे। वायु सेना ने सैफई हवाई पट्टी को लड़ाकू
विमानों के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए पूरी तरह सही और सुरक्षित बताया है।
इन दिनों वायुसेना के चार फाइटर प्लेन मिराज-2000 सैफई हवाई पट्टी पर
लैंडिंग और टेक ऑफ का अभ्यास कर रहे हैं।
सपा मुखिया मुलायम सिंह
यादव ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल में जब सैफई हवाई पट्टी के विस्तारीकरण का
आदेश दिया तो उस समय विपक्षी दलों ने उनकी आलोचना कर इस फैसले पर तमाम सवाल
खड़े किए थे। फैसले को अदूरदर्शी बताते हुए कहा था कि सैफई हवाई पट्टी पर
कौन सा जंबो जेट उतरेगा।
विस्तार के नाम पर सरकारी धन बर्बाद किया
जा रहा है। अब भारतीय वायु सेना ने यह कहकर कि सैफई हवाई पट्टी लड़ाकू
विमानों के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए पूरी तरह सही और सुरक्षित है, मुलायम
सिंह के फैसले को सही ठहराया है।
मुख्यमंत्री अखिलेश सिंह यादव के
गांव से करीब दस किमी दूर स्थित सैफई हवाई पट्टी को भारतीय वायु सेना ने
अपने एयरबेस के लिए पूरी तरह उपयुक्त पाया है। वायु सेना के सूत्रों का
कहना है कि युद्ध के दौरान या अन्य आपात स्थिति में सैफई हवाई पट्टी से
लड़ाकू विमान और दूसरे बड़े विमान टेक ऑफ और लैंडिंग करेंगे।
पिछले
दो दिनों से वायुसेना के चार फाइटर प्लेन मिराज-2000 सैफई हवाई पट्टी पर
लैंडिंग और टेक ऑफ की एक्सरसाइज कर रहे हैं। वायुसेना के लड़ाकू विमानों की
लैंडिंग और टेक ऑफ का यह अभ्यास 21 अगस्त तक चलेगा।
वायु सेना के
ग्वालियर एयरबेस से आए फाइटर प्लेन दिन भर में कई बार सैफई हवाई पट्टी पर
उतरते हैं और यहां से उड़ान भरते हैं। वायु सेना के सूत्रों का कहना है कि
सैफई हवाई पट्टी से रात में भी लड़ाकू युद्धक विमान टेक ऑफ और लैंडिंग कर
सकते हैं।
सैफई हवाई पट्टी पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों के अभ्यास
में 100 से ज्यादा एयरफोर्स के अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
वायु सेना ने लड़ाकू विमानों के अभ्यास के लिए सैफई हवाई पट्टी को पूरी तरह
अपने कब्जे में ले रखा है।
वायु सेना के निर्देश पर इटावा जिला
प्रशासन ने अभ्यास के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए फायर
ब्रिगेड की एक गाड़ी और एक एंबुलेंस तैनात की है। साथ ही हवाई पट्टी के
बाहरी इलाके में पुलिस और पीएसी के जवानों को तैनात किया गया है।
लड़ाकू
विमानों का अभ्यास देखने के लिए आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में लोग
सैफई हवाई पट्टी के पास पहुंच रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले इसी साल 16
मई को वायु सेना ने अपने दो लड़ाकू मिराज-2000 विमानों को सैफई हवाई पट्टी
पर सुरक्षित उतारा था।
उस समय भी दोनों विमान एयरफोर्स के ग्वालियर
एयरबेस से आए थे। दोनों लड़ाकू विमानों को सैफई हवाई पट्टी पर उतारने का
मकसद हवाई पट्टी का तकनीकी परीक्षण कर यह पुख्ता करना था कि यह हवाई पट्टी
लड़ाकू विमानों के टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए सुरक्षित है या नहीं।
ट्रायल
के दौरान सैफई हवाई पट्टी को युद्धक विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के लिए
पूरी तरह उपयुक्त पाया गया था। ऐसी भी खबरें हैं कि आगरा और ग्वालियर हवाई
अड्डों से कई निजी कंपनियों ने अपनी हवाई सेवाएं शुरू करने में दिलचस्पी
दिखाई है।
अगर ऐसा होता है तो वायु सेना को अपना नया ठिकाना ढूंढना
पडे़गा और फिलहाल सैफई हवाई पट्टी से बेहतर विकल्प उसके सामने कोई दूसरा
नहीं है।
सीओ सैफई अरुण कुमार दीक्षित ने इस बात की पुष्टि की कि
सेना के लड़ाकू विमानों के उतरने का अभ्यास सैफई हवाई पट्टी पर चल रहा है।
मंगलवार को वायुसेना का मालवाहक विमान हवाई पट्टी सकुशल उतारा गया। वायु
सेना की देखरेख में सुखोई लड़ाकू विमान भी उतारा जाएगा।