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सैफई आयुर्विज्ञान विवि थोरोसिक सर्जरी करने वाला पहला संस्थान बना

Fri, 17 Jun 2016 12:36 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो /इटावा
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एटा की मरीज पुष्पा देवी जिनका हुआ सफल आपरेशन - फोटो : अमर उजाला
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सैफई। उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कॉर्डियो वैस्कुलर एवं थोरोसिक सर्जरी विभाग के हार्ट सर्जन डॉ. अमित सिंह ने पहली सफल दूरबीन विधि (वैट्स) आधारित थोरोसिक सर्जरी की है। सर्जरी की खास बात यह रही कि मरीज को सर्जरी के दूसरे दिन हीअस्पताल से छुट्टी से दी गई।
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निदेशक डॉ. (ब्रिगे) टी. प्रभाकर ने बताया कि इस प्रकार के ऑपरेशन की सुविधा अभी तक उत्तर प्रदेश के किसी भी चिकित्सा विश्वविद्यालय या संस्थान में नहीं थी। इसके अलावा उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय का सीवीटीएस विभाग प्रदेश का पहला लेजर से वैट्स अर्थात वीडियो असिस्टेड थोरोसिक सर्जरी करने वाला विभाग भी बन गया है।

ब्रिगे प्रभाकर ने यह भी बताया कि सीवीटीएस विभाग में ओपेन हार्ट सर्जरी, कोरोनरी आर्टरी बाईपास सर्जरी, पेसमेकर प्रत्यारोपण, फेफड़ों एवं नसों की सर्जरी भी नियमित रूप से की जा रही है। वैट्स अर्थात वीडियो असिस्टेड थोरोसिक सर्जरी शुरू हो जाने से अब मरीजों को छाती एवं फेफड़ों की सर्जरी के लिए दिल्ली नहीं जाना पड़ेगा।
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ऑपरेशन करने वाले हार्ट सर्जन डॉ. अमित सिंह ने बताया कि यह पहला दूरबीन विधि (वैट्स) आधारित थोरोसिक सर्जरी एटा निवासी मरीज पुष्पा देवी (60) का किया गया। पुष्पा देवी को रेनॉड्स नामक रोग हो गया था। इसमें हाथ की अंगुलियों की नसों में रक्त संचार नहीं हो पाता है।

जिसके कारण अंगुलियों में घाव बनने लगता है। धीरे-धीरे यह घाव सड़न का रूप लेने लगता है। सड़न ज्यादा बढ़ने पर हाथ को काटना भी पड़ सकता है। इस रोग में हाथ के अंगुलियों में तेज दर्द के साथ जलन होना प्रमुख है।

पुष्पा देवी जब विश्वविद्यालय के सीवीटीएस विभाग में इन लक्षणों के साथ एडमिट हुईं तो कुछ प्रमुख जांच के बाद पता चला कि वह रेनॉड्स से पीड़ित हैं। लक्षणों को देखते हुए तत्काल ऑपरेशन करना पड़ा। इस प्रकार के ऑपरेशन में छाती की पसलियों पर चीरा लगाकर नसों की सर्जरी की गई।

यह सर्जरी पूरी तरह दूरबीन विधि पर आधारित वैट्स अर्थात वीडियो असिस्टेड थोरोसिक सर्जरी रही जिसमें लेजर से बिना चीर-फाड़ या रक्तस्राव के की गई। ऑपरेशन सफल रहा। इस प्रकार के नसों की सर्जरी को थोरोसिक सिम्पेथेक्टॉमी कहते हैं।

मरीज को एक दिन बाद ही अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। इस प्रकार के पहले वैट्स आधारित ऑपरेशन की सफलता पर निदेशक डॉ. (ब्रिगे) टी. प्रभाकर, संकाय अध्यक्ष प्रो. केएम शुक्ला, अपर निदेशक प्रशा. राधाकृष्ण सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आदेश कुमार ने विश्वविद्यालय के कॉर्डियो वैस्कुलर एवं थोरोसिक विभाग के हार्ट सर्जन डॉ. अमित सिंह तथा ऑपरेशन में भाग लेने वाले एनेस्थिसिया टीम को बधाई दी है।
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