महेवा (इटावा)। करवाचौथ के व्रत रखने के बाद रात को फांसी लगाकर जान देने वाली शीला का शनिवार को अंतिम संस्कार कर दिया गया। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद मायका पक्ष के लोग शव अपने गांव विहार बंसरी ले गए थे। शनिवार को मृतका का शव राहतपुर गांव स्थित ससुराल लाया गया। वहां पति ने अंतिम संस्कार किया। बेटी शीला की मौत से दुखी पिता ने कहा कि वह मानसिक रूप से बीमार थी। उन्हें अपने दामाद से कोई शिकायत नहीं है। पुलिस ने भी कोई तहरीर मिलने से इनकार किया है।
बकेवर थाना क्षेत्र के गांव राहतपुर निवासी सोमेश उर्फ रिंकू दोहरे की पत्नी शीला ने हाल ही में करवाचौथ के दिन व्रत रखने के बाद रात को घर के अंदर अपने कमरे में फांसी लगा ली थी। सोमेश ने उसे मरणासन्न स्थिति में फंदे से उतार कर रात में ही सैफई मिनी पीजीआई पहुंचाया था, जहां इलाज के दौरान शुक्रवार को उसकी मौत हो गई थी।
सूचना मिलने पर भरेह थाना क्षेत्र के विहार बंसरी गांव निवासी मृतका शीला के पिता राजाराम आदि अन्य मायका पक्ष के लोग भी सैफई पहुंच गए थे। पोस्टमार्टम के बाद मायका पक्ष के लोग शव को अपने साथ विहार बंसरी गांव ले गए थे। शनिवार सुबह शीला का शव जब राहतपुर गांव में उसकी ससुराल के घर पहुंचा तो लोग उमड़ पड़े। शव के साथ शीला के पिता राजाराम व ताऊ भोगीराम भी साथ में आए। प्रधान की मौजूदगी में शीला का अंतिम संस्कार हुआ। इस संबंध में अहेरीपुर चौकी प्रभारी राजवीर राजपूत ने बताया कि मामले में कोई शिकायत नहीं मिली है।
आठ संतानों में सबसे छोटी थी शीला
मेहनत मजदूरी करने वाले पिता राजाराम व माता रामजानकी की आठ संतानों में शीला सबसे छोटी थी। मां रामजानकी का पिछले साल निधन हो चुका है। पति सोमेश उर्फ रिंकू इंदौर की एक फैक्ट्री में रंगाई का काम करता है। पत्नी शीला गांव राहतपुर स्थित घर में अपने दो बच्चों के साथ रह रही थी। करवाचौथ से दो दिन सोमेश आया था। करवाचौथ के दिन शीला ने व्रत रखा और रात में उसने पति से इंदौर ले जाने की इच्छा जताई। आर्थिक तंगी के चलते सोमेश ने जब इनकार कर दिया तो उसने फांसी लगा ली थी।