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दुर्गंध और गंदगी के बीच लौट रहे ग्रामीण

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खिरीटी गांव में बाढ़ का पानी उतरने के बाद दलदल में तब्दील हुआ घर। संवाद - फोटो : ETAWAH
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चकरनगर। यमुना और चंबल का जलस्तर घटने के बाद बाढ़ग्रस्त गांवों में लोग घरों की ओर लौटने लगे हैं। बाढ़ के पानी से चारों ओर दुर्गंध व गंदगी पसरी है। अफसरों की चेतावनी के बावजूद ग्रामीण गृहस्थी संवारने में जुटे हैं। सोमवार को चंबल नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 119. 80 से घटकर 118. 10 पर आ गया है।
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बाढ़ग्रस्त 20 गांवों में सौ सफाई कर्मी मलबा हटाने के काम में जुटे हैं। चकरनगर में 19 गांवों में 2125 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। नदियों का पानी वापस धारा में लौट रहा है। गांव के रास्ते तो खुल गए हैं, परंतु कीचड़ से भरे रास्तों को ग्राम पंचायत स्तर पर साफ किया जा रहा है। स्वास्थ्य टीम गांव में उपचार दे रही। पशुपालन विभाग की टीम भी कैंप लगाकर पशुओं का उपचार कर रहा है।
हरोली गांव के ग्राम प्रधान मनीष दीक्षित ने बताया कि पूरे गांव में डुगडुगी बजाकर सभी को चेतावनी दी गई है घरों में नमी खत्म होने में एक हफ्ते लगेंगे। ऐसे में ग्रामीण घरों में न जाएं। बाढ़ के बाद कोई भी घर धराशायी हो सकता है। ग्रामीण चेतावनी पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। भरेह प्रधान राघवेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि गांव में साफ सफाई के साथ संक्रमण रोकने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है।
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उप जिला अधिकारी चकरनगर मलखान सिंह ने बताया गांव में पानी उतरने से सभी रास्ते खुल गए हैं। बाढ़ पीड़ितों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। बिजली विभाग के कर्मचारियों को लाइनों को ठीक करने के लिए कहा गया है। जल्द ही विद्युत आपूर्ति चालू करवाई जाएगी।

खिरीटी गांव के घरों में जाने वाले रास्ते में भरा पानी। संवाद- फोटो : ETAWAH

खिरीटी गांव में ग्रामीणों से समस्याएं पूछते एसडीएम मलखान सिंह। संवाद- फोटो : ETAWAH

जलवा राम में एंटी लार्वा का छिड़काव करते कर्मचारी। संवाद- फोटो : ETAWAH

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