मई 1857 में मेरठ से शुरू हुई प्रथम स्वाधीनता संग्राम की लड़ाई का गवाह ऐतिहासिक स्थल बिलैया मठ भी रहा है। इतिहास बताता है यहां भी क्रांतिकारियों ने हर-हर महादेव का उद्घोष करते हुए अंग्रेजी फौज के छक्के छुड़ा दिए थे।
आज यह स्थल उपेक्षित-सा है और जीर्णोद्धार के लिए सत्ताधीशों की बांट जोह रहा है। इतिहास के मुताबिक, मेरठ से स्वतंत्रता संग्राम शुरू होने के बाद क्रांतिकारियों से लड़ने के लिए कलकत्ता (अब कोलकाता) से वहां भेजी जा रही सैन्य सामग्री को लूटने के लिए मंगल पांडेय के क्रांतिकारी साथियों ने मोहल्ला फक्कड़पुरा के पास स्थित बिलैयामठ को चुना था।
तब यहां पर तत्कालीन कलेक्टर एलन ऑक्टोवियम ह्यूम था। उसे यह भनक लग गई तो अंग्रेजों की फौज को उसने सतर्क कर दिया। सख्ती दिखाते हुई कई लोगों को गिरफ्तार भी किया गया। इटावा-आगरा शेरशाह सूरी मार्ग के किनारे जसवंतनगर में आम के घने बाग में स्थित बिलैया मठ को क्रांतिकारियों ने अपना ठिकाना बनाया।
1857 की एक सुबह बैलगाड़ी पर सवार सशस्त्र क्रांतिकारियों को इस ओर आते देख अंग्रेजी फौज ने उनसे हथियार डालने को कहा। इस पर दोनों में मुठभेड़ हो गई। सूचना पर कलेक्टर ह्यूम और ज्वाइंट मजिस्ट्रेट डेनियल अपने वफादार सैनिकों के साथ वहां पहुंच गया। इस बीच बिलैया मठ में क्रांतिकारी सुरक्षित प्रवेश कर चुके थे।
ह्यूम ने मठ को घेर लेने का आदेश दिया। क्रांतिकारी हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ अंग्रेजों पर टूट पड़े। बड़ी संख्या में अंग्रेज सिपाहियों के साथ ज्वाइंट मजिस्ट्रेट डेनियल की भी मौत हो गई। डर के मारे कलेक्टर ह्यूम को उलटे पांव वहां से भागना पड़ा था।