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मीन की विरासत दर्ज करने को लेकर राजस्व विभाग संदेह के घेरे में

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राजस्व विभाग में भी विरासत दर्ज करने के नाम पर कैसा गोलमाल चलता है। इसका एक ताजा उदाहरण सदर तहसील के किल्ली सुल्तानपुर गांव में सामने आया है।
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आरोप है कि इस महिला का नाम खाताधारक के परिवार रजिस्टर में दर्ज नहीं है। इस पर आपत्ति जताते हुए एसडीएम और तहसीलदार को प्रार्थना पत्र दिया है।
किल्ली सुल्तानपुर गांव निवासी पंचम सिंह ने तहसीलदार को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि उसके चाचा छकौड़ी लाल की भूमि गाटा संख्या 672,1062 एवं 1025 उनके नाम दर्ज थी।
छकौड़ी लाल का निधन 24 नवंबर 2017 को हो गया। उनके परिवार में उनका कोई वारिसान नहीं था। इसके बाद राजस्व विभाग के कर्मचारियों ने 11 फरवरी 2020 एवं 29 फरवरी 2020 के आदेश के अनुसार स्व. छकौड़ी के नाम दर्ज भूमि को लड़ैती देवी के नाम दर्ज कर दिया।
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लड़ैती देवी को उनकी पुत्री दर्शाया गया है जबकि परिवार रजिस्टर में छकौड़ी लाल के परिवार में कोई लड़की दर्ज नहीं है। पंचम सिंह का कहना है कि छकौड़ीलाल उसके चाचा थे।
नियमानुसार वारिसान के तौर पर हम चार भाई मुकुट सिंह, मोहर सिंह, सुभाष चंद्र एवं पंचम सिंह के नाम भूमि दर्ज होना चाहिए थी।
उन्होंने गलत विरासत को निरस्त कर सही विरासत अंकित करने एवं रजिस्ट्रार कार्यालय में भूमि का क्रय विक्रय रोकने का आदेश पारित करने की मांग की है।
तहसीलदार सदर एन राम ने बताया कि शिकायत की जांच उन्होंने गांव में राजस्व विभाग की टीम भेजकर कराई थी। इसमें गांव वालों ने यह जानकारी दी कि छकौड़ीलाल की एक पुत्री लड़ैती देवी है।
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इसके नाम विरासत दर्ज हुई है। इसके बाद भी शिकायतकर्ता को आपत्ति है तो उनके न्यायालय में वाद दायर कर अपना पक्ष प्रस्तुत कर सकता है। न्यायालय के माध्यम से ही समाधान हो सकता है।
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