‘आर्थिक एवं सामाजिक रूप से पिछडे़ क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर स्वास्थ्य संबंधित अनुसंधान के लिए चयन किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य संबंधित अनुसंधान का विषय स्थानीय स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं होनी चाहिए ताकि रिसर्च से प्राप्त परिणाम का लाभ लोगों को मिल सके।’
यह बात उत्तर प्रदेश ग्रामीण आयुर्विज्ञान एवं अनुसंधान संस्थान में कार्यवाहक निदेशक एवं मेडिसिन विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो पीएस सिंह ने कही। वह पैरामेडिकल विज्ञान महाविद्यालय के फिजियोथेरेपी विभाग की रिसर्च मेथडोलाजी पर दो दिवसीय कार्यशाला के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे।
कार्यशाला में मुख्य वक्ता पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के डा. एजीके सिन्हा ने कहा कि चिकित्सा विज्ञान में शोध की बढ़ती हुई प्रवृति चिकित्सा विज्ञान की सभी शाखाओं के लिए अनिवार्य हो गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी बीमारी के बारे में शोध के लिए बीमारी से संबंधित प्राथमिक तथ्यों का संकलन किए बिना प्रमाणिक निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता है।
कार्यशाला के संयोजक डा. सूरज कुमार ने बताया कि कार्यशाला के पहले दिन मुख्य रूप से स्वास्थ्य संबंधित अनुसंधान के लिए रिसर्च डिजाइन यानि शोध प्रारूप पर जोर दिया जा रहा है।
इस अवसर पर प्राचार्य पैरामेडिकल विज्ञान महाविद्यालय अरुण नागरथ, अपर निदेशक प्रशासन राधा कृष्ण सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डा. एसके गुप्ता, न्यूरोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. रमाकांत यादव, कम्यूनिटी मेडिसिन के विभागाध्यक्ष डा. पीके जैन तथा फिजियोथेरेपी विभाग के विभागाध्यक्ष एवं कार्यशाला संयोजक डा. सूरज कुमार आदि उपस्थित रहे।