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फिरौती न मिलने पर अपहृत बालक की हत्या

Tue, 01 Dec 2015 12:20 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इटावा
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ऊसराहार (इटावा)। 13 दिन पूर्व अपहृत हुए बालक की हत्या कर दी गई। उसका शव मध्यप्रदेश के भिंड जिले में लावारिस अवस्था में पाया गया। सोमवार को परिजन शव लेकर गांव पहुंचे तो गुस्साए ग्रामीणों ने किशनी ऊसराहार मार्ग पर जाम लगा दिया। अपहर्ताओं ने फिरौती की मांग की थी जिसके पूरा न होने पर बालक की हत्या कर दी गई।
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थाना ऊसराहार क्षेत्र के नगला लालमन गांव निवासी उम्मेद सिंह पाल के 14  वर्षीय पुत्र हरीओम उर्फ आशिक गत 17 नवंबर को उस समय गायब हो गया था, जब वह मैनपुरी निवासी अपने फूफा के यहां जा रहा था। इसकी गुमशुदगी गत 21 नवंबर को ऊसराहार थाना में दर्ज कराई गई थी। गुमशुदगी दर्ज होने के बाद जब फिरौती को लेकर फोन आने लगे तो पुलिस ने गत 23 नवंबर को बालक के अपहरण किए जाने का मामला दर्ज किया था।

इसी बीच बालक हरीओम को 50 लाख रुपये के एवज मेें छोड़ने की शर्त सामने आई जिस पर परिजनों ने अपनी मजबूरी जाहिर की। तब यह मांग 10 लाख रुपये कर दी गई। लेकिन गत 27 नवंबर को मध्य प्रदेश के भिंड जिले के मौ गांव में बालक के शव मिलने की सूचना मिली। इस पर 29 नवंबर को परिजन मौ थाना पहुंचे। जहां फोटो देखने के बाद शिनाख्त की और 30 नवंबर को शव लेकर यहां आ गए।
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अपहरण के बाद बालक की हत्या किए जाने से गुस्साए ग्रामीणों ने किशनी ऊसराहार मार्ग पर शव रखकर जाम लगा दिया जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी लाइनें लग गई। गांव वाले काफी देर तक जाम लगाए रहे। कोई अधिकारी या पुलिस बल नहीं पहुंचा। इसके बाद थक हार कर ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। इस संबंध में जानकारी की तो पता चला कि ऊसराहार थानाध्यक्ष अभी मौ थाना में ही हैं। वहीं एसडीएम दिनेश सिंह ने कहा कि उन्हें जाम लगने की जानकारी नहीं हुई। उधर परिजनों के मुताबिक मंगलवार को शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
 

रकम गई और बच्चा भी
 परिजनो ने एसओजी और क्राइम व्रांच पर फिरौती की रकम दिलवाकर भी बालक को बरामद न कर पाने का आरोप लगाया है। बालक के पिता उम्मेद सिंह  व अन्य परिजनों ने कहा कि एसओजी और क्राइम व्रांच पुलिस ने गत 25 नवंबर को उदी क्षेत्र के एक कुए पर एक लाख 80 हजार रुपये फिरौती की रकम रखवाई थी। बालक को उदी चौराहे पर बरामद की बात कही थी। पिता उम्मेद सिंह का कहना है कि रकम भी चली गई और बेटे की भी बरामदगी नहीं हुई। उसने यह रकम कर्ज लेकर जुटाई थी। जबकि इस आरोप पर एसओजी प्रभारी आलोक राय ने कहा कि परिजनों ने जो रकम रखी, उससे उन्हें अवगत नहीं कराया गया था। इसलिए वह इस विषय में कुछ नहीं जानते।
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