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विश्वस्तरीय रामलीला पर कोरोना का ग्रहण

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- रामलीला में रावण दल फाइल फोटो। - फोटो : ETAWHA
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जसवंतनगर (इटावा)। कोरोना संक्रमण ने लोगों की रोजी रोटी, व्यापार और देश की आर्थिक और सामाजिक स्थित को चरमराकर रख दिया है। अब देश की सांस्कृतिक विरासतों पर भी इसका सीधा असर दिखने लग गया है। मैदानी रामलीलाओं में उत्कृष्ट गिनी जाने वाली और अंतरराष्ट्रीय संस्था यूनेस्को द्वारा घोषित नंबर वन विश्व विरासत जसवंतनगर की रामलीला पर भी कोरोना का ग्रहण लग गया है। यदि कोरोना का प्रकोप न होता, तो यह रामलीला महोत्सव 14 अक्तूबर से आरंभ हो जाता।
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रामलीला समिति जसवंतनगर के प्रबंधक राजीव गुप्ता और संयोजक ठाकुर अजेंद्र सिंह गौर ने बताया कि कोविड प्रोटोकाल के तहत सरकार ने अनलॉक 5 के लिए जो निर्देश जारी किए, उनके रहते यहां की रामलीला के लिए प्रशासन अनुमति देने में असमर्थ है। यहां की रामलीला में लीलाएं मंचीय नहीं होतीं, बल्कि लीलाओं का प्रदर्शन मैदानी होता है। नवमी और दशहरा के दिन तो पूरे नगर में सड़कों पर लीलाएं होतीं हैं।
यहां होने वाली लीलाओं में रोज हजारों लोग जुटते हैं। नवमी, दशहरा और गणेश, शंकर और राम बरात की शोभायात्राओं में भीड़ लाख की संख्या पार कर जाती है। कोरोना प्रोटोकाल में मात्र 100-200 लोगों की अनुमति है। ऐसे में रामलीला समिति राम की लीलाएं इस वर्ष कराने में असमर्थ है। बताया कि राम की कृपा से रामलीला समिति पर कोई आर्थिक तंगी नहीं है, लेकिन हम प्रशासन के साथ हैं।
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जसवंतनगर की ऐतिहासिक रामलीला की शुरुआत 1855 में हुई थी। देश में 1857 के गदर के दौरान दो वर्ष रामलीला आयोजित नहीं हुई थी। उसके बाद सन 1859 से निरंतर हर वर्ष रामलीला आयोजित हो रही है। एक दशक से यह रामलीला विदेशी शोधार्थियों का बड़ा आकर्षण बन गई थी। देश और प्रदेश के कल्चरल विभाग इस रामलीला के विश्व धरोहर स्वरूप को संजोने में लगा था।
प्रबंधक राजीव गुप्ता और संयोजक अजेंद्र गौर ने बताया कि जसवंतनगर की रामलीला से लोगों का आत्मिक और आध्यात्मिक दोनों ही तरह का जुड़ाव है। लोग वर्ष भर इसका बेसब्री से इंतजार करते हैं। दुर्भाग्य से इस बार लीलाएं नहीं हो पा रहीं हैं, फिर भी शगुन और प्रथा के तहत 18 अक्तूबर को कटरा पुख्ता स्थित नरसिंह मंदिर में परंपरागत तरीके से राम- लक्ष्मण आदि पात्रों का शृंगार होगा। लोग कोरोना प्रोटोकाल का तहत भगवान की आरती कर सकेंगे और राज्यभिषेक के साथ इस वर्ष की रामलीला कुछ ही घंटों में संपन्न कर दी जाएगी।
गणेश शोभायात्रा समिति ने भी राम लीला महोत्सव शुरू होने से पूर्व निकलने वाली गणेश शोभायात्रा को रद्द कर दिया है। मगर 14 अक्तूबर को खटखटा बाबा की कुटिया में गणेश प्रतिमा विराजित कर हवन आदि कर प्रथा को टूटने नहीं देगी। यह जानकारी समिति के पदाधिकारियों डॉ. पुष्पेंद्र पुरवार, अभिषेक यादव बल्लू, जितेंद्र वर्मा जीतू ने दी है।
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