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तरावीह के साथ ही मुकद्दस माह का आगाज

Thu, 18 Jun 2015 11:33 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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रमजानुल मुबारक का महीना शुरू हो गया। शाम को लोग तरावीह की नमाज के लिए तैयारी करते रहे। गर्मी की वजह से इशा का वक्त सवा नौ बजे से शुरू हो रहा है इसलिए इस बार तरावीह भी देर रात तक चलेगी।
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इसके साथ ही लोगों ने सुबह सहरी के लिए भी तैयारी शुरू कर दी। मुस्लिम बहुल इलाकों में सहरी और इफ्तार के लिए दुकानें सज गई हैं।

इस्लामी हिजरी कैलेंडर के दसवां महीना रमजानुल मुबारक का है। इस महीने में तीस दिनों तक रोजेदार भूखे प्यासे रहकर अल्लाह की इबादत करते हैं। रमजान के दिनों में सुन्नत नमाजों का सवाब सत्तर गुना बढ़ जाता है।

रमजान का चांद दिखने के बाद से ही तरावीह का सिलसिला शुरू हो जाता है। इसके बाद ईद का चांद दिखने तक तरावीह का सिलसिला चलता है। रमजान में कारोबार के सिलसिले से बाहर जाने वालों के लिए कई स्थानों पर रोज पांच और सात पारे की तरावीह का एहतेमाम किया गया है।
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शहर में उर्दू मोहल्ला, कटरा पुर्दल खां, मेवाती टोला, नया शहर, नौरंगाबाद, नई बस्ती, कटरा साहब खां, पचराहा, छपरेटी, कटरा शमशेर खां, दहाड़ी मोहल्ला, रामगंज, साबितगंज आदि में रौनक बढ़ गई है।

जगह-जगह सेेंवई, पापड़, खजूर और फलों की दुकानें लग गई हैं। रमजान के दौरान इन क्षेत्रों में देर रात तक रौनक रहेगी। कई स्थानों पर तो सहरी तक दुकानें भी खुली रहेंगी। 

शुरू हुई गंगा-जमुनी तहजीब की जुगलबंदी
इटावा। जी हां, महीने भर तक गंगा-जमुनी तहजीब की जुगलबंदी देखने को मिलेगी। बुधवार 17 जून से मलमास (पुरुषोत्तम मास) शुरू हो गया है, मलमास में जहां भक्ति परवान चढ़ेगी, आस्थावान अपना ज्यादातर समय पूजा-पाठ व भगवतनाम संकीर्तन में व्यतीत करेंगे।

वहीं, शुक्रवार से मुस्लिम समुदाय के लोग रमजान के पवित्र महीने में खुदा की इबादत करेंगे। मलमास 17 जुलाई तक रहेगा, जबकि 19 जून से शुरू हो रहे रमजान की रौनक अलसुबह से देर रात छाई रहेगी।

मलमास में देवालयों में जाकर शुद्ध चित्त होकर शिव सहस्त्रनाम पाठ, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ और गणपति आराधना करना चाहिए। श्रीमद्भागवत कथा सुनना व मलमास का संयोग भी अपने आप में बहुत दुर्लभ है।

कहा जाता है कि स्वर्ग में सब कुछ मिल जाता है, पर श्रीमद्भागवत कथा नहीं। भगवान मिल जाएंगे, लेकिन भगवान की कथा नहीं। मलमास अर्थात पुुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु ने मानव पुण्य के लिए बनाया है।  कर्मकांड विशेषज्ञों की माने तो मलमास माह में भगवान विष्णु की पूजा अर्चना की जाती है।

इस मास में जो भी पुण्य कार्य, श्रीमद्भागवत, गीता, श्रीराम चरित मानस का का अखंड पाठ या भगवान नारायण के मंत्रों का जाप किया जाए, वह नारायण को अर्पण कर देना चाहिए। इससे भगवान विष्णु सन्न होकर अभीष्ट फल प्रदान करते हैं।

मलमास
मलमास के महीने में ब्याह-शादी, जमीन जायदाद की खरीद-फरोख्त, मंदिर निर्माण, नये कारोबार की शुरुआत आदि शुभ कार्य रोक दिए जाते हैं।  मलमास में प्याऊ लगाने से अश्वमेध यज्ञ का फल प्राप्त होता है व शरणार्थी को शरण देने व धर्मशाला आदि का आश्रय देने से सौ अश्वमेध यज्ञों का फल प्राप्त होता है।

भूखे लोगों को भोजन दान करने से सहस्त्र अश्वमेध यज्ञों का फल प्राप्त होता है। तीर्थ में निवास करके दान, पुण्य, जाप करने वाला साक्षात विष्णु लोक को प्राप्त कर लेता है।

रमजान
इस्लाम में बुनियादी पांच कर्तव्यों को अमल में लाना आवश्यक है। पहला ईमान, दूसरा नमाज, तीसरा रोजा, चौथा हज और पांचवां जकात। इस्लाम में बताए गए इन पांच कर्तव्य इस्लाम को मानने वाले इंसान से प्रेम, सहानुभूति, सहायता तथा हमदर्दी की प्रेरणा पैदा कर देते हैं।

रमजान में रोजे को अरबी में सोम कहते हैं, जिसका मतलब है रुकना। रोजा यानी तमाम बुराइयों से परहेज करना। रोजे में दिन भर भूखा व प्यासा ही रहा जाता है। इसी तरह यदि किसी जगह लोग किसी की बुराई कर रहे हैं तो रोजेदार के लिए वहां पर खड़ा होना मना है। रमजान में पुण्य के कामों का सबाव सत्तर गुना बढ़ा दिया जाता है।

जकात इसी महीने में अदा की जाती है। रोजा झूठ, हिंसा, बुराई, रिश्वत तथा अन्य तमाम गलत कामों से बचने की प्रेरणा देता है। इसका अभ्यास यानी पूरे एक महीना कराया जाता है ताकि इंसान पूरे साल तमाम बुराइयों से बचे।
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