इटावा। जिला अस्पताल के इकलौते रेडियोलॉजिस्ट सोमवार को कोर्ट में बयान के लिए गए तो अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था पटरी से उतर गई। जिम्मेदारों ने न तो मरीजों को पूर्व में इसकी कोई सूचना देना उचित समझा और न ही कोई अस्थाई व्यवस्था की। नतीजतन, कई किलोमीटर दूर से आए मरीज निराश होकर लौट गए।
मौसम में उतार-चढ़ाव के बीच सोमवार को सुबह से ही ओपीडी में मरीजों की भीड़ जुटना शुरू हो गई थी। पंजीकरण कराने के लिए चारों काउंटरों पर कतारें लगी रहीं। दिनभर में 1400 मरीज दिखाने के लिए आए। इनमें से लगभग 300 मरीज वायरल के थे। वहीं, पेट से जुड़ी समस्याओं के भी लगभग 100 मरीज पहुंचे। इन सभी को अल्ट्रासाउंड लिखा गया, लेकिन रेडियोलॉजिस्ट न होने की वजह से मरीजों को भटकना पड़ा। जरूरी होने पर कई मरीजों ने निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों में 600 से 1200 रुपये देकर जांच कराई।
पहले से होती सूचना तो नहीं लगानी पड़ती दौड़
जिला अस्पताल में मोहल्ला करौल से दिखाने आईं सरिता ने बताया कि वह सुबह से भूखी प्यासी थीं। करीब आधे घंटे लाइन में लगने के बाद पंजीकरण कराया। इसके बाद करीब आधे घंटे लाइन में लगने के बाद डॉक्टर को दिखाया। डॉक्टर ने पथरी होने की आशंका के चलते अल्ट्रासाउंड लिखा, लेकिन पता चला कि रेडियोलॉजिस्ट न होने से जांच नहीं हो सकेगी।
तीन किलोमीटर से आए, लेकिन नहीं हो सका अल्ट्रासाउंड
वाह अड्डा निवासी नसीम अली ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूर हैं। बेटे अली के पेट में कई दिन से दर्द था। इस पर काम छोड़कर उसे दिखाने के लिए आए थे। करीब डेढ़ घंटे की मशक्कत के बाद डॉक्टर को दिखाया। उन्होंने अल्ट्रासाउंट के लिए लिखा। कराने के लिए गए तो पता चला कि जांच नहीं हो रही है। अब जा रहे हैं, कल की दिहाड़ी फिर छोड़नी पड़ेगी।
एक और रेडियोलॉजिस्ट की मांग की है
सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट कोर्ट में बयान के लिए गए थे। इस वजह से अल्ट्रासाउंड नहीं हो सका। जिले में रेडियोलॉजिस्ट कम होने की वजह से अस्थाई व्यवस्था नहीं हो सकी। हालांकि पहले से सूचित नहीं किया जा सका। अगली बार से इस तरह की स्थिति होने पर पहले से ही नोटिस बोर्ड पर चस्पा कर दी जाएगी, ताकि मरीजों को समस्या न हो।