इटावा की ओर पुल का धंसा हिस्सा।
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चंबल पुल के क्षतिग्रस्त होने से इटावा और भिंड जिले के लोगों की दुश्वारियां बढ़ गई है। इस पुल से होकर प्रतिदिन हजारों लोग बस, जीप से यात्रा करते हैं। ऐसे में इन लोगों को एक छोर से दूसरे छोर जाकर सवारी पकड़ने के लिए करीब एक किलोमीटर पैदल यात्रा करनी होगी। साथ ही किराया भी दोगुना देना पड़ेगा।
पुल के क्षतिग्रस्त होते ही ट्रकों के साथ ही सवारी वाहनों को भी रोक दिया गया। दोपहर में भिंड के तरफ की बसें पुल के उस किनारे तो इटावा की इस किनारे पर खड़ी हो गई। ऐसे में यात्रियों को पैदल पुल क्रास करना पड़ा। यह स्थिति करीब माहभर बनी रहेगी। पीडब्ल्यूडी राष्ट्रीय मार्ग खंड के एक्सईएन डीके गुप्ता ने बताया कि क्षतिग्रस्त पुल के संबंध में डीएम शमीम अहमद को अवगत करा दिया गया है। सेतु निगम के डीपीएम के साथ जायजा लिया है। इस बार काफी बड़ा हिस्सा धंसा है। विभागीय स्तर पर मरम्मत संबंधी कदम उठाए जा रहे हैं। बताया कि वह शुक्रवार को ही सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने अपना चार्ज कानपुर नेशनल हाईवे पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन वीके श्रीवास्तव को सौंपा है। अब वह ही इस पुल की मरम्मत का काम देखेंगे।
चौगुना बोझ लेकर गुजरते वाहन
चंबल नदी का पुल एक तरफ करीब 50 साल पुराना हो चुका है। इस पुराने पुल को लेकर जो एहतियात बरतनी चाहिए, उसमें ढिलाई बरती जाती है। गिट्टी-मौरंग से भरे ओवरलोड ट्रक धड़ल्ले से पार होते हैं। पहले भी जब पुल क्षतिग्रस्त हुआ था तो ओवरलोडेड ट्रकों की आवाजाही रोके जाने की मांग उठी थी। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक्सईएन डीके गुप्ता ने बताया कि आमतौर पर 20 टन वजन गुजरना चाहिए। लेकिन 70 टन तक वजनी वाहन पुल से गुजरते हैं।