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कचरा निस्तारण में माटी में मिला दिए पौने दो करोड़

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कचरा निस्तारण के लिए लगी मशीन कई महीने से बंद पड़ी है - फोटो : ETAWHA
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इटावा। शहर से निकलने वाले कचरा के निस्तारण के नाम पर नगर पालिका ने एक साल में 1 करोड़ 68 लाख रुपये मिट्टी में मिला दिए। ठेकेदार संस्था कामेद गांव के पास बने प्लांट में कचरे का पहाड़ खड़ा कर दिया है। कचरे के इस पहाड़ से उठने वाले बदबू और धूल से कामेद समेत आसपास गांव के लोग परेशान हैं।
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गत वर्ष नगर पालिका परिषद ने कूड़ा निस्तारण प्लांट चलाने के लिए लखनऊ की एकार्ड हाइड्रो एयर प्रालि नाम की फर्म को अनुबंधित किया। अनुबंध की शर्तों के अनुसार फर्म को मशीनरी एवं उसमें प्रयोग होने वाला डीजल नगर पालिका देगी। बाकी कूड़ा घरों से इकट्ठा कर प्लांट तक पहुंचाने एवं प्लांट में काम करने के लिए श्रमिकों की आपूर्ति फर्म करेगी। नगर पालिका प्लांट चलाने के लिए फर्म को 14 लाख रुपये प्रतिमाह भुगतान करेगी। इसके अलावा 40 हथठेला, 13 ट्रैक्टर, जेसीबी आदि पालिका की रहेगी। मशीनरी में टूटफूट एवं मरम्मत की जिम्मेदारी फर्म की होगी। 14 लाख प्रतिमाह की धनराशि से फर्म को शहर से इकट्ठा होने वाला कूड़ा करकट प्लांट पर ले जाकर उसका निस्तारण करना था।
फर्म ने अपने 60 कर्मचारी लगाकर कूड़ा शहर भर से इकट्ठा तो किया परंतु
प्लांट नहीं चलाया। फलस्वरूप कूड़े का निस्तारण नहीं हुआ। कामेत स्थित प्लांट पर साल भर के कूड़े का पहाड़ जैसा बन गया। अब एक नवंबर से फर्म का अनुबंध भी समाप्त हो गया है। नया अनुबंध हुआ नहीं है। इसलिए अब
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शहर से प्रतिदिन 60-70 टन कूड़ा एकत्रित करके कामेत प्लांट भेजा जाता रहा है। महीने भर में 2100 टन एवं साल भर में कुल 25200 टन कूड़ा कचरा प्लांट में पड़ा हुआ है। इसके निस्तारण की अभी कोई व्यवस्था नहीं है।
कूड़ा निस्तारण के नाम पर पालिका ने साल भर में 1 करोड़ 68 लाख का कचरा कर डाला। फर्म अपना भुगतान लेकर चली गई अब सवाल यह है कि कूड़ा का निस्तारण आखिर कैसे होगा और कौन कराएगा।
शासन की कूड़ा कचरा से बिजली बनाने की योजना के तहत वर्ष 2006 में कामेत गांव में लगभग 4 एकड़ में कूड़ा निस्तारण प्लांट बनाया गया था। योजना यह थी यहां शहर भर से कूड़ा लाकर इकट्ठा होगा। उसका निस्तारण कर कूड़े से बिजली बनाने की परियोजना पर काम होगा। परंतु अन्य योजनाओं की तरह से यह योजना भी कचरे के डिब्बे में चली गई। कूड़ा निस्तारण का ही काम होता रहा। अब पिछले दो सालों से प्लांट भी ठीक नहीं चला। प्लांट में कूड़े कचरे का ढेर तो लगाया जाता है परंतु उसका निस्तारण नहीं किया जाता। पिछले वर्ष गांव के लोगों ने हंगामा किया तो साफ सफाई हुई परंतु इसके बाद फिर काम पुराने ढर्रे पर लौट आया।
नगर पालिका परिषद के चेयरमैन प्रतिनिधि फुरकान अहमद ने कहा कि कूड़ा निस्तारण के लिए शासन की नई नीति बनाई जा रही है। इसीलिए कूड़ा निस्तारण के लिए फर्मों को अनुबंधित करने के लिए निविदाएं नहीं मांगी गई। शासन की मंशा यह है कि कूड़े का निस्तारण प्लांट में करने की बजाय मोहल्ले में ही कर दिया जाए। इस काम के लिए सर्वे हो चुका है। शासन का आदेश मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। रही बात अनुबंधित फर्म के कूड़ा निस्तारण न करने की तो उसके संचालकों को नोटिस दिया जा रहा है।
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