शहर को ट्रैफिक जाम से निजात दिलाने के लिए पालिका ने एक बार फिर से अभियान चलाने की तैयारी कर ली है। सब ठीक रहा तो 9 फरवरी से शहर में अतिक्रमण पर बुलडोजर चलेगा। इस बार के अभियान की खास बात ये होगी कि अतिक्रमण में मिला सामान जब्त कर लिया जाएगा। उसे जुर्माना वसूल करने के बाद ही छोड़ा जाएगा।
आठ माह के भीतर वैसे तो तीन बार अभियान चलाया जा चुका है लेकिन अभियान के पीछे फिर से अतिक्रमण हो जाने से असर नहीं दिखा। इस बार अभियान को सफल बनाने के लिए एडीएम को प्रभारी बनाया गया है। पालिका क्षेत्र में 22 चौराहे हैं। इनमें से आधा दर्जन से अधिक चौराहे ऐसे है जहां पर दिन के समय पर निकल पाना संभव नहीं होता।
शाम के समय तो पैदल तक नहीं निकल सकते हैं। शहर में जाम लगने के दो मुख्य कारण माने जा रहे है। इनमें एक प्रमुख सड़कों पर दोनों ओर दस-दस फीट तक अतिक्रमण तथा दूसरा वाहनों का बेतरतीब संचालन है। दिन के समय जाम लगने के लिए जिम्मेदार स्कूल बसों पर कार्रवाई करने के लिए कुछ माह पहले ही जिलाधिकारी ने शिकंजा कसने के लिए परिवहन विभाग को दायित्व साैंपा था, लेकिन कार्रवाई कुछ नहीं हुई।
पालिका ने अतिक्रमण हटाने के लिए इससे पहले मई माह में भी अभियान चलाया था। इसके बाद नवंबर तथा दिसंबर महीने में जीआईसी, स्टेशन बजरिया, पक्का तालाब से तिकोनियां तक अभियान चलाया गया था। मगर आगे अभियान चलता रहा तो पीछे-पीछे जैसा का तैसा होता गया।
अतिक्रमण अभियान चलाने के लिए जिलाधिकारी पालिका के अधिकारियों की बैठक ले चुके हैं। सिटी मजिस्ट्रेट तथा अतिरिक्त मजिस्ट्रेट को कार्य योजना तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। अभियान को सफल बनाने के लिए एडीएम को प्रभारी बनाया जा रहा है।
पलट कर नहीं देखते अधिकारी
तीन माह पहले पक्का तालाब से तिकोनिया तक अभियान चलाया गया था, लेकिन दूसरे दिन ही हालात जैैसे के तैसे हो गए। इसी प्रकार जीआईसी के सामने भी डेढ़ माह पहले जेसीबी मशीन से अवैध अतिक्रमण हटा दिया गया था। वर्तमान में जीआईसी गेट के सामने फिर से झुग्गियां बस गई हैं। कारण यह है कि अधिकारी औपचारिक ता तो पूरी कर देते हैं, लेकिन फिर पलट कर नहीं देखते।