इटावा। आने वाले जिला पंचायत चुनाव में इस बार समाजवादी पार्टी की राह आसान नहीं होगी। सपा को भाजपा से तो मुकाबला करना ही होगा अब प्रसपा भी मैदान में आकर संघर्ष को और कड़ा बनाने जा रही है। प्रसपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने रविवार को स्पष्ट कर दिया कि प्रसपा जिला पंचायत के चुनाव मैदान में अपने प्रत्याशी उतारेगी। उनकी इस घोषणा से इटावा के राजनीतिक हलकों में काफी हलचल पैदा हो गई है।
जिले में डेढ़ दशक से जिला पंचायत पर सपा का कब्जा रहा है। पिछले पंचायत चुनावों में सपा की तरफ से शिवपाल सिंह यादव ही कर्ता धर्ता हुआ करते थे। इस बार शिवपाल सिंह यादव सपा से अलग हैं। अब उनकी पार्टी ने जिला पंचायत सदस्य के उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर दी है। ऐसे में सपा के सामने बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
चौगुर्जी स्थित अपने आवास पर पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायतों के चुनाव में जिला कमेटियों को पूरी छूट उन्होंने दे दी है। वे अपने निर्णय के संबंध में उनके साथ राय मशविरा करने के बाद अंतिम फैसला करेंगे। जिला पंचायत सदस्य पद का चुुनाव प्रसपा जरूर लड़ेगी।
अब विलय नहीं गठबंधन होगा
पूर्व मंत्री शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि व उन्होंने नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के फौरन बाद देश भर के समाजवादियों को एक मंच पर लाने का जो प्रयास किया। उसे पलीता लगाने वाले कौन थे। समाजवादी परिवार में बिखराव करने वाले कौन हैं, क्या आप नहीं जानते हैं। देश में बिखरा हुआ समाजवादी परिवार एक करने के लिए सबसे पहले मैंने ही पहल की थी।
तब नीतीश कुमार, एचडी देवगौड़ा, शरद यादव, ओमप्रकाश चैटाला का पूरा परिवार, लालू यादव, कमल मोरारका अजीत सिंह अंसारी बंधु तक समाजवादी पार्टी में विलय के लिए तैयार हो गए थे। इन सबने मुलायम सिंह यादव को अपना नेता मान लिया था।
अगर यह सब हो जाता तो क्या नेताजी देश के सामने भाजपा का विकल्प नहीं बन सकते थे। श्री यादव ने कहा कि उस समय इसे तुड़वाने का सूत्रधार कौन था। अब किसी भी पार्टी में प्रसपा का विलय नहीं होगा, गठबंधन हो सकता है।