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चुनावी साल में वादे पूरे न कर पाने का मलाल

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इटावा। कोरोना महामारी के चलते सारी व्यवस्थायें प्रभावित हुई हैं। ग्राम पंचायतों को मिलने वाले सालाना बजट में 35 से 40 फीसदी तक की कटौती की गई है। ग्राम प्रधानों के कार्यकाल का यह आखिरी वर्ष है। बजट में हुई कटौती के कारण ग्राम प्रधान जनता से किए वादे पूरी नहीं कर पा रहे हैं। जिससे उन्हें आगामी चुनाव में जनता के सवालों का डर सता रहा है।
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जिले में कुल 471 ग्राम पंचायतें हैं। इन पंचायतों से जुड़े गांवों में नाली, खरंजा, गली, स्ट्रीट लाइट, सोलर लाइट, हैडपंप मरमत, सबमर्सिबल पंप आदि से जुड़े कार्य ग्राम पंचायतें ही कराती हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार पंचायतों को सीधे धनराशि देतीं है। जिले में केंद्रीय 15वें वित्त आयोग से करीब 50 करोड़ और राज्य वित्त आयोग से करीब 25 करोड़ कुल 75 करोड़ की धनराशि हर साल पंचायतों को दी जाती हैं। पंचायतों में इस धनराशि का वितरण आबादी के हिसाब से किया जाता है।
एक औसत के मुताबिक बड़ी ग्राम पंचायतों को सालाना करीब एक करोड़ तथा छोटी पंचायतों को 70-75 लाख रुपया हर साल विकास एवं निर्माण कार्यों के लिए मिलता है। अब पिछले दो सालों से ग्राम प्रधानों के हाथ मामूली रकम आ रही है। जिससे गांव की जरूरतों के हिसाब से काम कराना मुश्किल है। निर्वाचित ग्राम प्रधान चुनावी साल में ही अपने किए वादे पूरे करवाते हैं। जिससे मतदाता उनके साथ और मजबूती से जुड़ सकें।
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ग्राम प्रधान संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने कहा कि ग्राम प्रधानों के सामने बहुत गंभीर समस्या है। गांव के विकास कार्य दो साल से नहीं हो पा रहे हैं। शासन को गांव पंचायतों के विकास के लिए धनराशि में कटौती नहीं करनी चाहिए।
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