मौजूदा समय में करोड़ों रुपये की लागत से पुलिस विभाग में कामकाज हो रहे हैं। बावजूद इसके पुलिस अस्पताल से कबाड़ का ग्रहण नहीं हट पा रहा है।
इसकी नीलामी न होने के कारण वर्षों से बिल्डिंग का निर्माण अधर में लटका हुआ है। अब एक बार फिर पुलिस विभाग नए सिरे से कबाड़ के मूल्य का आकलन कराने के लिए पीडब्ल्यूडी को प्रस्ताव भेजने की तैयारी कर रहा है।
कोशिश रहेगी कि कबाड़ की कीमत कम हो जाए, जिससे उसकी आसानी से नीलामी हो सके। गौरतलब है कि पोस्टमार्टम हाउस के पास पुलिस विभाग का अस्पताल बना हुआ है।
अंग्रेजों के जमाने में बनी बिल्डिंग खंडहर हो गई है। यहां नए सिरे से निर्माण कराए जाने को लेकर यहां से अस्पताल पुलिस लाइन में अस्थायी तौर पर शिफ्ट कर दिया गया है।
वर्षों से अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया चल रही है, लेकिन काम शुरू नहीं हो पा रहा। ऐसा तब है जब प्रदेश में सपा की सरकार है और पुलिस विभाग में करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य कराए जा रहे हैं। अस्पताल निर्माण में धन की कमी नहीं बाधा है पुरानी बिल्डिंग से निकलने वाले कबाड़ की।
दरअसल अस्पताल निर्माण की प्रक्रिया के दौरान मौजूदा बिल्डिंग के कबाड़ की नीलामी की जानी है। इसकी कीमत करीब आठ लाख रुपये आंकी गई है। बीते दिनों इसके लिए नीलामी भी हुई। कबाड़ का कारोबार करने वालों ने पुलिस अस्पताल के कबाड़ की अंतिम बोली दो लाख रुपये के करीब लगाई।
बोली कम होने और अनुमानित लागत अधिक होने से नीलामी नहीं हो सकी और बिल्डिंग निर्माण का कार्य अधर में लटक गया। जिले में आने वाले कई एसएसपी पुलिस अस्पताल को हाईटेक बनवाने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन कबाड़ के राह में रोड बन जाने के कारण आज तक पुलिस अस्पताल का निर्माण नहीं हो सका।
अब एक बार फिर एसएसपी मंजिल सैनी के निर्देश पर पुलिस विभाग कबाड़ की कीमत का नए सिरे से आकलन कराने के लिए पीडल्ब्यूडी को प्रस्ताव भेजने की तैयारी में है। उम्मीद है कि अबकी कबाड़ की नीलामी हो जाएगी और अस्पताल का निर्माण शुरू हो जाएगा।
एसएसपी मंजिल सैनी ने बताया कि पुलिस अस्पताल के निर्माण को लेकर प्रयास किए जा रहे हैं। कबाड़ के मूल्य का नए सिरे से आकलन कराया जा रहा है। उम्मीद है कि इसके बाद यहां के कबाड़ की नीलामी हो जाएगी और बिल्डिंग का निर्माण कार्य भी जल्द ही शुरू हो जाएगा।
सैकड़ों परिवारों को होगा फायदा
जिले में अगर पुलिस विभाग का अपना हाईटेक अस्पताल बन जाता है तो पुलिस लाइन में रहने वाले पुलिसकर्मियों के साथ ही उनके सैकड़ों परिवारों को इसका लाभ मिलेगा।
मौजूदा समय में पुलिस लाइन में दो कमरों में अस्थायी रूप से चल रहे अस्पताल में सिर्फ खाना पूरी ही होती है। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए पुलिस कर्मियों को जिला अस्पताल से लेकर सैफई रिम्स के ही चक्कर काटने पड़ते हैं।
पहले मिलता था पर्याप्त इलाज
पोस्टमार्टम हाउस के पास बने पुलिस अस्पताल में दो दशक पहले तक पुलिस कर्मियों को अच्छा इलाज मिलता था। ओपीडी के साथ ही यहां इनडोर की भी व्यवस्था थी। दो दशक पूर्व अस्पताल बदहाली की ओर बढ़ता चला गया। अस्पताल की बिल्डिंग खंडहर होने के साथ ही डाक्टरों का टोटा हो गया।