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इस नरक से कोई तो निकालो

Tue, 13 Jan 2015 01:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इटावा
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मु़ख्यमंत्री के गृह जिले में सफाई अभियान दम तोड़ रहा है। शहर के लाइन पार क्षेत्र में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण कई मोहल्ले नरक बन गए है। सर्दी के मौसम में भी इन मोहल्लों की गलियों में गंदा पानी भरा हुआ है। हालात यहां तक बिगड़ चुके है कि कई लोग घरों में ही कैद हो जाने को मजबूर है।
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बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे है रात के  समय कोई मेहमान आने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। कई बार स्थानीय लोगों की ओर से तहसील दिवसों में भी मामला उठाया जा चुका है लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही। रामनगर क्षेत्र के तलैया मोहल्ले में स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि लोग अपने घरों में जाने के लिए परेशान हैं।

तलैया में आसपास के आधा सैकड़ा से अधिक घरों का पानी आता है। तलैया पर चारों ओर अतिक्रमण हो जाने से पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर रहा है। एक दर्जन से अधिक घरों के सामने गंदा बदबूदार पानी भरा हुआ है। कुछ लोंगोें ने पानी के बीच में पत्थर रखकर कर घर तक जाने का रास्ता बना लिया है।
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लेकिन कुछ घर ऐसे है जिनके सामने पत्थर रख पाना भी संभव नही है। लोगों को कच्चे रास्तों के माध्यम से घर पहुंचना पड़ता है। तलैया की गलियों को देखकर ऐसा लगता है कि जैसे बरसात का महीना हो। स्थानीय लोगाें का कहना है कि यहां पर तो बारहाें महीने ही नरक जैसा नजारा रहता है।

कई बार वे तहसील दिवसों तथा नगरपालिका के अधिकारियाें के सामने भी रोना रो चुके हैं, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया है। अधिकारियों क ा कहना है कि लाइन पार क्षेत्र में जलनिकासी की सुविधा न होने के कारण समस्या है।

अड्डा सती की गलियों में कीचड़
मानिक मोड़ के पास बसे अड्डा सती की गलियों में कीचड़ भरा हुआ है। घरों का गंदा पानी निकालने के लिए कोई व्यवस्था नही होने के कारण पानी गलियों में भर रहा है। लोगों को कीचड़ से निकल कर घरों तक पहुंचना पड़ रहा है। शहर में होने के बाद भी पंचायत मानिकपुर विसू में साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है।

न तो झाड़ू लगती है न ही कचरा उठाया जाता है। कभी कभार नाली जरूर साफ हो जाती है। ग्राम पंचायत में आने के कारण पालिका की ओर से कोई व्यवस्थाएं नहीं की जा रही है जबकि पंचायत के पास बजट नहीं है। जल निकासी की कोई व्यवस्था नहीं होेने के कारण गलियां भी क्षतिग्रस्त हो चुकी है। सैकड़ों की संख्या में लोग नारकीय जीवन गुजारने को मजबूर हैं।
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