कोविड-19 की दस्तक के बाद जहां बड़े-बड़े चिकित्सा संस्थान केवल कोविड-19 की महामारी पर ही केंद्रित रहे वहीं चिकित्सा विश्वविद्यालय, सैफई ने इस दौरान कई नए आयाम रचे।
कोरोना से लड़ने के लिए लेवल-3 अस्पताल को विकसित करने के साथ ही कोविड के इलाज में सहायक आरएनबी तथा कोविड-19 मैनेजमेंट पर आधारित पुस्तक कोविडोलॉजी लिखी गई। ताकि अन्य संस्थान भी कोरोना को मात दे सकें।
कुलपति व प्रख्यात न्यूरोसर्जन डॉ. राजकुमार ई-ओपीडी के अलावा सुपरस्पेशियालिटी विभाग न्यूरोसर्जरी में भी नियमित रूप से विश्वस्तरीय जटिल एवं माइक्रो न्यूरो सर्जरी करते रहे।
कुलपति डॉ. राजकुमार ने बताया कि कोविड-19 की शुरुआत के बाद न्यूरोसर्जरी विभाग में मार्च 2020 से अब तक 75 ब्रेन ट्यूमर के बड़े ऑपरेशन, 53 दिमाग की गंभीर चोटों के ऑपरेशन जिसमें दिमाग में खून के थक्के जमने की गंभीर शिकायत वाले मरीज, 31 सिर की चोट एवं सिर में पानी भरे बच्चों का ऑपरेशन, आठ रीढ़ की हड्डी के ऑपरेशन किए गए।
इनमें अधिकांश ऑपरेशन उत्तर प्रदेश के दूरदराज के जिलों से तथा बड़े चिकित्सा संस्थानों से रेफर किए गए मरीजों के किए गए। उन्होंने बताया कि कोविड-19 अस्पताल में अभी तक 1100 से ज्यादा कोरोना संक्रमित मरीज ठीक होकर डिस्चार्ज किए जा चुके हैं।
महामारी के दौरान अस्पताल प्रशासन द्वारा नियमित रूप से इमर्जेंसी सेवाएं भी 24 घंटे प्रदान की गईं। प्रति कुलपति डॉ. रमाकांत यादव ने बताया कि कोरोना के दौर में भी न्यूरोसर्जरी विभाग में होने वाले ऑपरेशन में कई गुना बढ़ोत्तरी हुई।
इनमें कई ऐसे जटिल ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए गए हैं जिनकों लखनऊ, दिल्ली आदि के बड़े चिकित्सा संस्थानों ने रेफर किया था। ऑपरेशनों की जटिलता कुछ ऐसी है जिनके दौरान मरीज की ब्रेनइंजरी, लंबे समय की बेहोशी, लकवा आदि का खतरा रहता है। लेकिन ऑपरेशन किए गए किसी भी मरीज में ऐसा नहीं हुआ।