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इटावाः अभिभावकों पर फीस और किताबें खरीदने का दबाव

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बकेवर। चालू शैक्षिक सत्र में परिषदीय व निजी स्कूलों में आनलाइन कक्षाएं संचालित हो रहीं हैं। निजी स्कूलों के संचालक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल अभिभावकों से शिक्षण शुल्क की मांग कर रहे हैं। साथ ही दुकानदारों से कॉपी-किताब खरीदने का भी दबाव बना रहे हैं। लॉकडाउन के चलते कई अभिभावकों का रोजगार प्रभावित हुआ है। ऐसे में फीस न दे पाने वाले विद्यार्थियों को आनलाइन क्लास के लाभ से वंचित किया जा रहा है।
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स्कूल संचालकों के इस रवैये से अभिभावकों की बेचैनी बढ़ गई है। लखना कस्बे के नहर बाजार निवासी अभिषेक कुशवाहा का कहना है कि उनका चार वर्षीय बेटा एक प्ले स्कूल में पढ़ता है। मार्च से ही व्हाट्सएप ग्रुप पर पाठ्य सामग्री भेजी जा रही थी। ग्रुप पर मिले निर्देशों का बखूबी पालन भी किया जाता रहा, लेकिन पिछले माह से बराबर कॉपी-किताब खरीदने व फीस जमा करने का दबाव बनाया जा रहा है।
ऐसा न होने पर ग्रुप से रिमूव करने की चेतावनी दी जा रही है। खेड़ा निवासी बृजमोहन ने बताया कि उनके दो बच्चे निजी स्कूल में पढ़ते हैं। वह एक निजी कंपनी में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन में नौकरी चली गई। अब उनसे बच्चे की आनलाइन क्लास के लिए शिक्षण शुल्क मांगा जा रहा है। फीस अदा करने के लिए समय मांगने पर आनलाइन क्लास से वंचित करने की बात कही जा रही है। ऐसे में बच्चों का भविष्य खतरे में है।
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क्या बोले जिम्मेदार
खंड शिक्षा अधिकारी दिग्विजय सिंह का कहना है कि कक्षा एक से आठ तक के निजी विद्यालयों के बच्चों को शुल्क के अभाव में आनलाइन शिक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा। साथ ही विद्यालय प्रबंधकों को अभिभावकों से सिर्फ ट्यूशन फीस जमा करवाकर आवश्यकतानुसार छूट देने के निर्देश दिए गए हैं।
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