निवाड़ीकला। केंद्र सरकार के पबजी गेम को प्रतिबंधित कर देने से अभिभावकों में काफी खुशी है। उनका कहना है कि इस में बच्चे रात-दिन गेम में लगे रहते थे, जिससे उनकी पढ़ाई बाधित होती थी। इसके अलावा उनके स्वास्थ्य पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा था। लोगों ने सरकार से बचे हुए सभी एप को भी प्रतिबंधित करने की मांग की है।
इस बारे में रमेश चंद, महेश, राजू का कहना है कि ऐसे एप को हटाना बहुत ही सराहनीय है। बच्चे दिन भर मोबाइल में लगे रहते हैं, इससे उनकी आंखों की रोशनी भी कम हो रही है। डॉ.अनुज शुक्ला ने बताया कि यह गेम एक नशा जैसा था। इस वजह से बच्चों में चिड़चिड़ापन, एकांगता जैसी कई समस्याओं का जन्म होने लगा था। जो कहीं न कहीं उनके लिए घातक है।
इंद्रापुर के आनंद कुमार ने बताया कि वे अपने पुत्र के पबजी गेम से बहुत परेशान थे। सरकार ने बहुत अच्छा कदम उठाया है। अब हम बेहद खुश हैं कि कम से कम अब वह अपना ध्यान पढ़ाई में तो लगाएगा। निवाड़ीखुर्द के अर्जुन चौहान का कहना है कि पब्जी जी गेम अच्छा था। वह भी खेलता था। लेकिन बच्चों के लिए कहीं न कहीं ज्यादा खतरनाक था। सरकार के फैसले का सम्मान है। हमने इसे तब ही फोन से हटा दिया था जब टिकटॉक बंद हुआ था।
निवाड़ीकला निवासी भोले गुप्ता ने बताया उन्हें नहीं पता कि मोबाइल में बच्चे क्या खेलते हैं, लेकिन दिन भर उसी में जुटे रहते हैं, उनका फोन दिनभर देखने को नहीं मिलता था। पबजी गेम बंद होने से गुरुवार को दिन भर खाली रखा रहा। सरकार ने यह अच्छा किया। पप्पू यादव का कहना है कि पबजी का बंद होना काफी फायदेमंद है। बच्चे गेम खेलते समय घंटों बर्बाद कर देते थे। कुछ काम भी नहीं करना चाहते। दूसरी ओर पढ़ाई में भी व्यवधान था ज्यादा मोबाइल चलना नुकसानदायक है।