सैफई । उप्र आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग में बनी एलपीए (लाइन प्रोब एसे) लैब का निरीक्षण कुलपति प्रोफेसर रमाकांत यादव ने किया। बताया कि एलपीए लैब को मान्यता मिलने से टीबी के गंभीर मरीजों के सैंपल की जांच अब विश्वविद्यालय में ही संभव हो सकेगी।
पहले इस जांच को आगरा भेजना पड़ता था। जिससे रिपोर्ट आने में 10 से 15 दिन का समय लग जाता था। अब विश्वविद्यालय में ही जांच हो सकेगी। 72 घंटे में टीबी के गंभीरता की पहचान हो जाएगी। एलपीए लैब प्रभारी डा. अमित सिंह ने बताया कि एलपीए लैब विश्वविद्यालय के माइक्रोबायलॉजी विभाग में बनकर तैयार है। इस लैब के चालू हो जाने के बाद आसपास के तकरीबन चार से पांच जनपदों के ड्रग रेजिस्टेंट टीबी रोगियों की समय पर जांच और इलाज सुनिश्चित हो सकेगा।
उन्होंने बताया कि एलपीए लैब की सुविधा प्रदेश के कुछ गिने-चुने चिकित्सा संस्थानों में ही उपलब्ध है। देश से 2025 तक टीबी को पूरी तरह खत्म करने की मुहिम में एलपीए लैब बेहद महत्वपूर्ण होगा। निरीक्षण के दौरान माइक्रोबायोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डा. राजेश कुमार वर्मा तथा फैकेल्टी धर्मेद्र प्रसाद सिंह उपस्थित रहे।