इटावा। कोरोना से निपटने के लिए मंगलवार को कराए गए मॉक ड्रिल में ही व्यवस्था की सांसें उखड़ गईं। मरीज को देखने में डॉक्टर पीपीई किट और दस्ताने पहनना ही भूल गए। हेल्प डेस्क का ऑक्सोमीटर भी खराब था।
100 शैया (एमसीएच) महिला अस्पताल में मॉक ड्रिल कराया गया। जिलाधिकारी अविनाश राय के आने से कुछ देर पहले प्रवेश द्वार पर हेल्प डेस्क बनाई गई। वहां रखा पल्स ऑक्सोमीटर खराब सभी का ऑक्सीजन लेवल एक ही बता रहा था।
जिलाधिकारी ने थर्मल स्कैनर से तापमान की जांच कराकर अस्पताल में प्रवेश किया। डीएम, एसएसपी जयप्रकाश सिंह और नोडल अधिकारी डॉ.एसएल वर्मा की देखरेख में मॉक ड्रिल शुरू किया गया।
एंबुलेंस से स्ट्रैचर पर लेटे डमी कोरोना मरीज को उतारते ही ऑक्सीजन दी गई। मरीज की जांच करते समय डॉ.शादाब आलम को दस्ताने नहीं पहने थे। नोडल अधिकारी ने इसकी जानकारी जिलाधिकारी को दी। जिलाधिकारी ने डॉक्टर को ग्लब्स पहनने के निर्देश दिए। मरीज को ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ स्ट्रेचर पर कोविड वार्ड ले जाया गया। लिफ्ट के बजाए मरीज को रैंप से ले जाया गया।
स्वास्थ्यकर्मी भी पीपीईकिट नहीं पहने थे। जिलाधिकारी ने भले ही ये मॉकड्रिल था, लेकिन एल-टू अस्पताल के स्टाफ को पीपीई किट पहननी चाहिए थी। अगली बार किसी तरह की ढिलाई न मिले।
डीएम ने कहा कि इस बात का विशेष ध्यान रखा जाए कि स्टाफ अथवा मरीज अस्पताल की दीवार अथवा रेलिंग कतई नहीं छुए। डॉक्टरों से पूछा कि पीपीई किट कहां उतारते हैं बताए जाने पर उस स्थान को जाकर देखा।
जिलाधिकारी ने कहा कि इस समय सभी को मास्क लगाकर चलने व दो गज की दूरी का पालन करना चाहिए। जिन लोगों को बूस्टर डोज नहीं लगी है वह जरूर लगवा लें। वैक्सीन की कमी नहीं है। बंद लिफ्ट चलवाने व ऑपरेटर नियुक्त करने के लिए भी कहा।
सीएमओ डॉ.गीताराम, एसीएमओ डॉ.बीएल संजय, महिला सीएमएस डॉ.कजली गुप्ता, पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ.एमएम आर्या आदि उपस्थित रहे।