सैफई। नीट काउंसलिंग में हो रहे विलंब को लेकर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने शुक्रवार को ओपीडी सेवाएं बंद रखीं।
इस दौरान काली पट्टी बांधकर विरोध जताया। ओपीडी सेवाएं ठप होने से आसपास के जिलों से उपचार के लिए पहुंचे बीमारों को वापस जाना पड़ा। गौरतलब हो कि पिछले एक सप्ताह से चल रहे जूनियर डाक्टरों के देशव्यापी आंदोलन के समर्थन में सैफई में भी हड़ताल पर हैं।
शुक्रवार को हड़ताल पर रहते हुए मेडिकल विश्वविद्यालय की ओपीडी सेवाएं पूरी तरह बंद रखीं। जूनियर डाक्टरों का आरोप है कि सरकार एवं न्यायालय नीट काउंसलिंग मामले को लंबा खींच रहे हैं।
इसकी वजह से जूनियर डाक्टरों पर काम का बोझ अत्यधिक है। इसको लेकर पूरे भारत में जूनियर डाक्टर हड़ताल पर हैं। कई जगह ओपीडी सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। जूनियर रेजिडेंट डाक्टरों का कहना है कि आने वाले दिनों में सारी चिकित्सा सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा।
उधर, ओपीडी सेवा बंद होने पर औरैया के कटियापुर निवासी आजाद सिंह की पत्नी बेबी ने कहा कि वह तीन साल की बेटी जीनू को दिखाने के लिए सर्जरी विभाग में आई हुई थी।
ओपीडी बंद होने की वजह से यहां से हमें घर पर वापस जाना पड़ रहा, जिससे काफी बड़ी दिक्कत हो रही है। मैनपुरी के करहल निवासी कन्हैया लाल ने बताया कि पांच साल के बेटे आदित्य को बीते दिनों चोट लग गई थी। जिसका प्लास्टर कटवाने के लिए आए हुए थे।
जहां पर ओपीडी बंद होने की वजह से काफी बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा। इसी तरह सैफई क्षेत्र के उसरई निवासी अमलेश ने बताया कि बीते दिनों पैर की हड्डी टूट गई थी, जिसका ऑपरेशन कराया था।
आज प्लास्टर खुलने वाला था। ओपीडी में प्लास्टर कटाने के लिए आए, लेकिन बंद होने से प्लास्टर नहीं कट सका। फिरोजाबाद के सिरसागंज निवासी हरगोविंद ने भी अपनी पीड़ा बताते हुए कि दूसरा प्लास्टर कराने के लिए ओपीडी में आए थे।
हड़ताल होने की वजह से हमारा प्लास्टर नहीं हो सका। अगर हमें पता होता तो हम एक-दो दिन बाद ही आते। सुशीला ने बताया कि दो वर्षीय नाती प्रवीण की बीते दिनों से तबीयत खराब थी, जिसका उपचार यहां पर चल रहा था। आज फिर दिखाना था। हड़ताल के कारण वापस जाना पड़ रहा है।