फोटो: 6 अनंत चतुर्दशी पर पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में प्रवचन करते मुनि भावसागर महाराज व श्रद
जसवंतनगर। पर्यूषण पर्व और दशलक्षण महापर्व के अंतिम दिन शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी मनाई गई। कस्बे के श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में श्रद्धा और भक्ति का माहौल रहा। श्रद्धालुओं ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म की विधिवत आराधना की। मुनि भावसागर महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन देते हुए कहा कि आत्मा में रमण करने वाले को ब्रह्मचारी कहते हैं।
सुबह मंदिर में भगवान का अभिषेक और शांतिधारा की गई। श्रद्धालुओं ने विश्व शांति, सुख-समृद्धि और आत्मकल्याण की कामना की। मुनि भावसागर महाराज ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य केवल बाहरी संयम नहीं, बल्कि आत्म-कल्याण का मार्ग है। मुनि ने दशलक्षण महापर्व को आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का अवसर बताया। उन्होंने विकारों को पहचानकर दूर करने का प्रयास करने को कहा।
शांतिधारा के सौधर्म इंद्र बनने का सौभाग्य चंद्र शोभा जैन, प्रयांक जैन, शिखा जैन व नेत्रा जैन परिवार को मिला। विधि-विधान से शांतिधारा के बाद विशेष पूजा-अर्चना हुई। अनंत चतुर्दशी पर जैन समाज के लोगों ने व्रत, उपवास और संयम का पालन किया। भगवान वासुपूज्य के निर्वाण कल्याणक महोत्सव का भी आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान वासुपूज्य को निर्वाण लाडू अर्पित कर पूजन किया। मंदिर में सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक विधान संपन्न हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान मंदिर परिसर भगवान के जयकारों और धार्मिक भजनों से गूंजता रहा।