विंध्याचल के गजियाघाट पर गंगा में डूबे बच्चे की तलाश करते गोताखोर। अमर उजाला
कार्तिक पूर्णिमा पर्व पर श्रद्धालुओं ने पांच नदियों के संगम पचनद कुंड में डुबकी लगाकर भगवान कालेश्वर महाराज का जलाभिषेक किया। नदी में दीपदान कर भगवान शिव व मां गौरी की पूजा अर्चना की। इस दौरान महिलाएं वस्त्र बदलने की कोई व्यवस्था न होने काफी नाराज भी दिखी। हालांकि पुलिस के बंदोवस्त चुस्त दुरुस्त रहे। सोमवार को पचनद पर यूपी व एमपी से आए करीब एक लाख लोगों ने स्नान किया। सुबह से ही इसका क्रम शुरू हो गया। कालेश्वर मंदिर में भक्तों की पूजा अर्चना का तांता लगा रहा।
चकरनगर क्षेत्र में पचनद अपने एतिहासिक एवं धार्मिक मान्यता को लेकर विख्यात है। यह स्थान इटावा, औरैया, जालौन व भिंड की सीमा पर स्थित है। यहां यमुना, चंबल, क्वारी, सिंध व पहूज नदियों का संगम होने के कारण पचनद कहा जाता है। कार्तिक पूर्णिमा पर यहां प्रति वर्ष पांच दिन के मेले का आयोजन होता है। कई लाख लोग यहां पचनद में स्नान कर भगवान शिव का अभिषेक करते हैं। इस बार भी श्रद्धालुओं की संख्या काफी रही।
लेकिन नोट बंदी का असर दिखा। मेले में आए दुकानदारों की बिक्री अपेक्षाकृत हुई। इसके अलावा स्नान के बाद महिलाआें को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पहले पर्दे लगाए जाते थे। इस बार इनका इंतजाम नहीं किया गया। महिलाओं ने एक दूसरे का सहयोग लेते हुए गीले वस्त्र बदले। वहीं पुलिस सुरक्षा के माकूल इंतजाम होने से मेले सुचारू रूप से चलता रहा।