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ब्लड बैंक में नहीं बचा है एक दिन का खून

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कोरोना वायरस की वजह से जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में अब इतना खून भी नहीं बचा है, जिससे किसी जरूरतमंद की जान भी बचाई जा सके।
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कोरोना की वजह से 25 मार्च से लेकर 31 मई तक लॉकडाउन होने के बावजूद दो संस्थाओं ने रक्तदान शिविर का आयोजन किया।
इससे सिर्फ 67 यूनिट खून मिल सका था। लॉकडाउन खुलने के 50 दिन बीत गए हैं, लेकिन ब्लड बैंक में खून नहीं है।
ब्लड बैंक की ओर से रक्तदान के लिए जिन सरकारी कार्यालयों से संपर्क किया गया सभी से सिर्फ आश्वासन ही मिला। कोई भी सरकारी कार्यालय अथवा सामाजिक संगठन ने कोई रुचि नहीं दिखाई।
ब्लड बैंक के रोस्टर बोर्ड पर 20 जुलाई को सिर्फ नौ यूनिट खून होने का ब्यौरा दर्ज है। इनमें ए पॉजिटिव पांच यूनिट और ओ पॉजिटिव चार यूनिट खून है।
लैब टेक्नीशियन अर्जुन सिंह ने बताया कि ब्लड बैंक में 600 यूनिट ब्लड रखने की क्षमता है। इसके लिए 300-300 यूनिट के दो बड़े फ्रीजर हैं। बताया मई में आयोजित हुए दो रक्तदान शिविर से बैंक को 67 यूनिट खून मिला था।
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रेडक्रॉस संस्था ने आठ मई को दो दिवसीय रक्तदान शिविर का आयोजन किया था, जिससे 44 यूनिट खून मिला था।
शिविर की खास बात यह थी कि इसमें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए रक्तदाता को रक्तदान करने का समय दिया गया था।
इसी वजह से शिविर दो दिन आयोजित किया गया था। 23 मई को भरथना में राष्ट्रीय भ्रष्टाचार उन्मूलन समिति के आनंद भदौरिया की ओर से शिविर में 23 यूनिट खून मिला था। बताया जबकि रोजाना करीब 10 से 12 यूनिट ब्लड की मांग रहती है। बदले में 800 यूनिट खून दे चुके हैं।
पिछले वर्ष 14 शिविर आयोजित हुए थे, जिनसे 346 यूनिट खून मिला था। इस वर्ष अप्रैल से लेकर चार माह बीतने को है सिर्फ दो शिविर ही आयोजित हो सके हैं। मदर डेयरी, पुलिस लाइन, स्टेट बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बड़ौदा बैंक समेत कई अन्य कार्यालयों से संपर्क कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
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इस बारे में जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. एस एस भदौरिया ने बताया कि गंभीर मरीज को खून की जरूरत होती है तो सैफई भेज देते हैं। रक्तदान शिविर लगाए जाने के संबंध में सीएमओ से बात की है, जिससे कि उनके प्रयासों से शिविर आयोजित हो सके।
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