इटावा। जी रामजी (मनरेगा) के कार्यों में फर्जी फोटो अपलोड कर मजदूरी हड़पने के मामलों पर अब जल्द ही शिकंजा कसने जा रहा है। शासन के निर्देश पर जिले में सक्रिय जॉब कार्डधारकों की ई-केवाईसी (इलेक्ट्रॉनिक केवाईसी) कराई जा रही है। नई व्यवस्था के बाद एक ही फोटो दोबारा अपलोड करने करने पर एप उसे स्वयं की निरस्त कर देगा। इससे मनरेगा में होने वाला फर्जीवाड़ा रुकेगा।
ई-केवाईसी पूरी होने के बाद कार्यस्थल पर श्रमिकों की फोटो विशेष मोबाइल एप के माध्यम से ही अपलोड की जाएगी। यदि कोई व्यक्ति एक ही फोटो को दोबारा अपलोड करने या गलत फोटो डालने की कोशिश करेगा तो एप उसे स्वयं निरस्त कर देगा। इस नई व्यवस्था से मनरेगा में वर्षों से चली आ रही फर्जीवाड़े की समस्या पर प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है।
जिले में वर्तमान में कुल 1.85 लाख सक्रिय मनरेगा जॉब कार्डधारक पंजीकृत हैं। इनमें से अब तक 1.18 लाख मजदूरों की ई-केवाईसी पूरी कर ली गई है जबकि शेष मजदूरों की प्रक्रिया अभी बाकी है। ई-केवाईसी प्रणाली के तहत अब कार्यस्थल पर ली गई फोटो का मिलान आधार कार्ड में दर्ज फोटो से किया जाएगा। एप में ऐसी तकनीक विकसित की गई है कि वह फोटो के स्थान (लोकेशन) की भी जांच करेगा।
यानी किसी दूसरे स्थान या पुराने फोटो को अपलोड करने की कोशिश पर सिस्टम तुरंत अलर्ट हो जाएगा और फोटो स्वीकार नहीं होगी। मनरेगा में लंबे समय से यह शिकायतें सामने आती रही हैं कि कई जगहों पर बिचौलिये या जिम्मेदार कर्मचारी फर्जी फोटो लगाकर मजदूरी निकाल लेते हैं। इससे वास्तविक मजदूरों को न तो पूरा लाभ मिल पाता है और न ही सरकारी धन का सही उपयोग हो पाता है। नई व्यवस्था में आंख की रेटीना (आंखों की पहचान) के माध्यम से भी श्रमिकों की पहचान सुनिश्चित की जाएगी।
शासन की मंशा है कि मनरेगा पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक आधारित हो। ई-केवाईसी के बाद एप पर फोटो का मिलान आधार और लोकेशन से होगा। यदि किसी तरह की गड़बड़ी पाई जाती है तो फोटो स्वयं ही खारिज हो जाएगी और संबंधित कार्य की मजदूरी जारी नहीं हो सकेगी।
-राकेश प्रसाद, उपायुक्त मनरेगा।